नई दिल्ली, प्रेट्र। राफेल सौदे में आरोप-प्रत्यारोप के बीच वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि राजीव महर्षि आर्थिक मामलों के सचिव भले ही रहे, लेकिन उनका रक्षा मंत्रालय के व्यय प्रस्तावों से कभी कोई लेनादेना नहीं रहा।

वित्त मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण कांग्रेस द्वारा भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) राजीव महर्षि पर लगाए गए आरोपों के क्रम में आया है। कांग्रेस ने कहा था कि महर्षि राफेल सौदे के दौरान वित्त सचिव हुआ करते थे, इसलिए उन्हें राफेल सौदे पर प्रस्तुत होने वाली सीएजी की रिपोर्ट से खुद को अलग कर लेना चाहिए।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि महर्षि 31 अक्टूबर 2014 को आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव बने। पांच सचिवों में सबसे वरिष्ठ होने के कारण उन्हें 11 नवंबर 2014 को वित्त सचिव बनाया गया। उन्होंने आर्थिक और वित्त सचिव के रूप में 31 अगस्त 2015 तक कार्य किया।

मंत्रालय ने कहा, वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग सरकार के सभी मंत्रालयों से संबंधित वित्तीय आवंटन का काम देखता है। इस क्रम में रक्षा खरीद से संबंधित कोई भी फाइल व्यय विभाग के सचिव द्वारा निपटाई गई, न कि महर्षि द्वारा जो उस समय आर्थिक मामलों के सचिव थे।

 

Posted By: Bhupendra Singh