नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। राजस्थान में कई दिनों से सियासी उठापटक चल रही है। इस बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी सियासी संग्राम को काबू में करने के लिए पार्टी के कुछ नेता आगे आए हैं। हालांकि, सीएम गहलोत सहित कई कांग्रेसी नेताओं ने पायलट व उनके समर्थक विधायकों के समक्ष माफी की शर्त रख दी है। ऐसे में मामला और फंस गया है। कांग्रेस में जारी अंतर्विरोध के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज भाजपा नेता वसुंधरा राजे की चुप्पी को लेकर पार्टी परेशान है। उनको लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को डर हैं कि वह पार्टी न छोड़ दें।

वसुंधरा राजे भाजपा से अलग होने जैसा भी कदम उठा सकती हैं

पिछले कुछ समय से पार्टी में हो रहे फैसलों से नाखुश वसुंधरा राजे को लेकर भाजपा नेताओं में इस बात की चिंता है कि वे कहीं कठोर कदम ना उठा लें। वसुंधरा राजे पार्टी के कार्यक्रमों एवं बैठकों में भी शामिल नहीं हो रही हैं। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने बताया कि अभी खामोश नजर आ रहीं वसुंधरा राजे आगामी दिनों में पार्टी से अलग होने जैसा भी कदम उठा सकती हैं।

वसुंधरा राजे ने पूरे प्रकरण से दूरी बनाए रखी

उधर, कांग्रेस के आंतरिक कलह को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया सहित कई स्थानीय नेता सीएम गहलोत पर निशाना साध रहे हैं। प्रदेश भाजपा के नेताओं को उम्मीद है कि गहलोत सरकार गिरी तो उन्हें ही सत्ता में आने का मौका मिलेगा। ये नेता लगातार बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन वसुंधरा राजे ने पूरे प्रकरण से दूरी बनाए रखी। इस बीच उन पर एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल गहलोत के साथ सांठगांठ का आरोप लगाए हैं। अलबत्ता, वसुंधरा राजे ने ट्वीट कर पिछले दिनों कहा था कि वे पार्टी और विचारधारा के साथ खड़ी हैं, लेकिन जब केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक के भाजपा नेता लगातार कांग्रेस को घेरते रहे तो राजे ने पूरी तरह चुप्पी बनाए रखी।

राजे की चुप्पी से कांग्रेस खुश

वसुंधरा राजे की चुप्पी से कांग्रेस खुश है। सीएम अशोक गहलोत का कहना है कि वसुंधरा राजे बड़ी नेता हैं। वसुंधरा राजे से टक्कर लेने के चक्कर में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया व विपक्ष के उप नेता प्रदेश की सरकार गिराने की साजिश में जुटे हैं। वहीं प्रदेश के उर्जा मंत्री डॉ.बीडी कल्ला का कहना है कि वसुंधरा राजे को कमजोर करने के लिए भाजपा का एक गुट जुटा है। लेकिन, ये वसुंधरा राजे का मुकाबला नहीं कर सकते । उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को गिराकर भाजपा का वर्तमान प्रदेश नेतृत्व खुद सत्ता में आना चाहता है । भाजपा का प्रदेश नेतृत्व वसुंधरा राजे को किनारे करना चाहता है।

पार्टी के मौजूदा हालात से खुश नहीं हैं राजे 

सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे भाजपा के मौजूदा हालात से खुश नहीं हैं। दो दिन पहले गठित हुई कार्यकारिणी में अपने विश्वस्तों के बजाय मदन दिलावर व दीया कुमारी जैसे विरोधियों को जगह देने से वसुंधरा की नाराजगी पहले से अधिक बढ़ी है। 2018 में गजेंद्र ड्क्षसह शेखावत को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाने को लेकर वसुंधरा राजे का भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ टकराव हुआ था। मुख्यमंत्री रहते हुए वसुंधरा राजे ने अपने मंत्रिमंडल के आधा दर्जन सदस्यों व कई विधायकों को दिल्ली भेजकर शेखावत को अध्यक्ष नहीं बनाए जाने को लेकर लॉबिंग कराई थी। उसमें वे सफल भी रहीं थी। विधानसभा के पिछले चुनाव में पार्टी की हार के बाद वसुंधरा को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

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