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बांकीपुर रिजल्ट का साइड इफेक्ट, लालू-राबड़ी की चुप्पी; RJD में होने वाला है कुछ बड़ा?

By Arvind SharmaEdited By: Narender Sanwariya
Published: Wed, 05 Aug 2026 08:40 PM (IST)Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:34 PM (IST)

बांकीपुर उपचुनाव में राजद की हार के बाद लालू परिवार और पार्टी में गहरा मतभेद सामने आया है, जहां तेजस्वी, ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बांकीपुर उपचुनाव में राजद की जमानत जब्त हुई

  2. लालू परिवार के सदस्यों के बयान एक-दूसरे से भिन्न

  3. लालू-राबड़ी की चुप्पी से पार्टी में हलचल के संकेत

अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। बांकीपुर उपचुनाव में राजद की जमानत जब्त होने के बाद सबसे ज्यादा साइड इफेक्ट लालू यादव की पार्टी और परिवार में दिखने लगा है। नतीजे के बाद लालू परिवार के चार सक्रिय नेताओं ने चार तरह के बयान दिए। किसी की बात एक-दूसरे से मेल नहीं खाती दिखी।

तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा की हार बताया तो तेज प्रताप यादव ने एक कदम आगे बढ़कर प्रशांत किशोर को बधाई दे दी। मीसा भारती ने जनसुराज को भाजपा की 'लोमड़ी' बता दिया तो रोहिणी आचार्य ने प्रशांत किशोर के संघर्ष की सराहना करते हुए तेजस्वी पर सीधा तंज कसा।

पार्टी से लेकर परिवार तक में बड़ी हलचल

इस बीच, पांच बार के विधायक और पार्टी के प्रति समर्पित नेता भाई वीरेंद्र ने सांसद संजय यादव के करीबी शक्ति यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जाहिर है, स्थापना के तीन दशक बाद राजद सबसे बुरे दौर से गुजरता दिख रहा है। ऐसे में लालू यादव एवं राबड़ी देवी की चुप्पी भी बहुत कुछ बोल रही है। पार्टी से लेकर परिवार तक में बड़ी हलचल की ओर संकेत कर रही है।

लालू-राबड़ी की खामोशी

लालू यादव हर बड़े घटनाक्रम पर खुलकर बोलने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं। अस्वस्थ रहने के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए उनकी प्रतिक्रिया आती रही है, लेकिन इस बार मौन हैं। उनका आखिरी संदेश पांच जुलाई को राजद के स्थापना दिवस पर आया था। उसके बाद से उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

राबड़ी देवी की खामोशी इससे भी लंबी है। उनका आखिरी पोस्ट 11 जून को लालू यादव के जन्मदिन पर आया था। इससे पहले उन्होंने सरकारी बंगला खाली कराने के आदेश का खुलकर विरोध किया था, लेकिन बाद में बिना किसी प्रतिरोध के बंगला खाली कर दिया।

उपचुनाव में भी उनकी चुप्पी रहस्यमय

चुनाव में भी लालू प्रसाद न तो प्रचार के लिए मैदान में उतरे और न ही कार्यकर्ताओं के नाम कोई संदेश जारी किया। पार्टी के भीतर मतभेद हों, सहयोगी दलों से रिश्तों का सवाल हो या विपक्ष की रणनीति, अब तक लालू का रुख ही राजद की आधिकारिक लाइन माना जाता रहा है। ऐसे में बांकीपुर जैसे महत्वपूर्ण उपचुनाव में भी उनकी चुप्पी रहस्यमय है।

लालू परिवार के अलग-अलग बयान 

नतीजे के बाद लालू परिवार के भीतर से भी अलग-अलग बयान आए। तेजस्वी यादव ने नतीजे को भाजपा की हार के रूप में पेश किया और संदेश दिया कि जनता ने सत्तापक्ष को झटका दिया है। इसके उलट तेज प्रताप यादव ने प्रशांत किशोर को जीत की बधाई देकर अलग संकेत दिया। प्रचार के दौरान उन्होंने जनसुराज का साथ दिया था और नतीजे के बाद भी जनादेश का स्वागत किया। मीसा भारती का रुख भी तेजस्वी की लाइन से अलग दिखा।

तेजस्वी यादव पर परोक्ष टिप्पणी

उन्होंने जनसुराज को भाजपा की 'लोमड़ी' बताया और यह भी कहा कि भाजपा ने ही भाजपा को जिताया है। सबसे ज्यादा चर्चा रोहिणी आचार्य की है। उन्होंने प्रशांत किशोर के संघर्ष और लगातार जनता के बीच रहने की सराहना करते हुए लिखा कि जीत उसी की होती है, जो लगातार संघर्ष करता है और जनता के बीच रहता है। इसे तेजस्वी यादव पर परोक्ष टिप्पणी माना जा रहा है।

पिछले कुछ समय से विपक्ष के भीतर भी यह सवाल उठता रहा है कि तेजस्वी की सक्रियता चुनावी मौसम तक अधिक सीमित रहती है और चुनाव खत्म होते ही उनकी राजनीतिक सक्रियता भी कम हो जाती है। जाहिर है, लालू परिवार के अलग-अलग सुर, संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी और नेतृत्व की चुप्पी का संकेत है कि राजद के साथ लालू परिवार के भीतर भी बड़ी हलचल होने वाली है।