नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पहली मोदी सरकार में वित्त मंत्री के साथ रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका जाना केवल भाजपा और मोदी सरकार के लिए ही छति नहीं है, बल्कि देश की अर्थ व्यवस्था और आम लोगों के लिए भी बड़ा झटका है। आर्थिक मामलों की बेहतर समझ, दूरदर्शिता और कड़े फैसले लेने की हिम्मत ने उन्हें मोदी सरकार का ट्रबलशूटर (विघ्नहरता) बना दिया था। अपने इन्हीं गुणों के दम पर उन्होंने महज पांच वर्ष के वित्तमंत्री के कार्यकाल में नया इतिहास रच दिया। आइये जानतें हैं, उनके ऐसे ही कुछ प्रमुख फैसलों के बारे में...

अरुण जेटली के प्रमुख फैसले
नोटबंदी (Banknote Demonetisation): अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 08 नवंबर 2016 को नोटबंदी की ऐतिहासिक घोषणा की। प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को तुरंत बंद कर दिया था। इसके बाद सरकार को नए नोटों की व्यवस्था करने और हालात सामान्य करने के लिए महीनों काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। वित्तमंत्री रहते हुए अरुण जेटली ने लगातार घंटों काम किया। अरुण जेटली के कार्यकाल का ये सबसे बड़ा फैसला था।

वस्तु एवं सेवा कर (GST) : सभी राज्यों की सहमति से जीएसटी (Goods & Service Tax) लागू करना मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी, जो केवल अरुण जेटली के कुशल नेतृत्व से ही संभव हो सका। केंद्र सरकार ने जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किया, तो इसे पिछले कई दशकों में सबसे बड़े कर सुधार के तौर पर देखा गया। जिस तरह से किसी भी नई व्यवस्था में परेशानियां आती हैं, उसी तरह से जीएसटी में भी शुरूआत में व्यापारियों और ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन जल्द ही ये लोगों की जीवन का हिस्सा बन गया। बतौर वित्तमंत्री जेटली ने आम लोगों व व्यापारियों की सलाह पर जीएसटी के स्लैब में कई बार परिवर्तन भी किए।

इनसॉल्वेंसी एवं बैंक्रप्टसी कोड (IBC) : विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में ये, जीएसटी से बड़ा सुधार साबित होगा। आजाद भारत के इतिहास में Insolvency & Bankruptcy Code (आईबीसी) के तहत ऐसा पहली बार हुआ है कि दिवालिया होने से निपटने के लिए समय-सीमा लागू की गई है। पहले कोई समय-सीमा न होने की वजह से मामला वर्षों तक खिंचता रहता था। इसने उधारकर्ता और लेनदार संबंधों को और मजबूत किया है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019 में इस कानून के तहत कुल 70,000 करोड़ रुपये की वसूली हुई। इसी तरह दो-तीन लाख करोड़ रुपये के ऋण के 4452 मामले IBC में जाने से पहले ही हल हो गए।

मौद्रिक नीति आयोग (MPC) : बहुमत के माध्यम से सरकार-आरबीआई की समिति (Monetary Policy Committee) द्वारा ब्याज दरों का निर्धारण करने के लिए एक स्प्ष्ट रूपरेखा तैयार की। साथ ही केंद्रीय बैंकों को एक्सप्रेस चार फीसद मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने का लक्ष्य दिया गया।

NPA क्लीनअप : बैंकों का डूबा कर्ज निकालने के लिए अरुण जेटली के नेतृत्व में Non-Performing Asset (गैर निष्पादित संपत्ति) क्लीनअप की योजना शुरू हुई। इस दौरान पता चला कि राज्यों द्वारा संचालित कुछ सरकारी बैंकों की हालत बेहद खराब है। मार्च 2018 में बैंकों का औसत एनपीए 31 फीसद था। अरुण जेटली के अथक प्रयासों की वजह से दिसंबर 2018 में एनपीए घटकर 10.3 फीसद रह गया था। मार्च 2019 में एनपीए घटकर 9.3 फीसद रह गया था। अरुण जेटली ने 2020 तक एनपीए घटकर 8 फीसद करने का लक्ष्य रखा था।

बैंकों का एकीकरण : पूर्व की बहुत सी सरकारों ने राज्य सरकारों द्वारा संचालित सरकारी बैंकों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने के लिए बैंकों के एकीकरण (Bank Conslidation) की जरूरत बताई थी। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद अरुण जेटली ने ये कदम उठाया और सफल भी रहे। इसके तहत पांच एसोसिएट्स बैंक और भारतीय महिला बैंक का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में विलय हुआ। वहीं देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बरौडा में विलय हुआ।

जनधन योजना (JAN-DHAN): जनधन योजना के तहत देशभर में अभियान चलाकर उन लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए, जिनके पास कोई खाता नहीं था। इसका मकसद गरीबों के खातों में सीधे सब्सिडी भेजना था। इससे सब्सिडी की चोरी रोकने में सरकार को काफी मदद मिली।

दीर्घ स्थिरीकरण (Macro Stabilisation) : मोदी सरकार को कमजोर अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। लिहाजा सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली के सामने इससे उबरने की बड़ी चुनौती थी। जेटली की निगरानी में कच्चे तेल की कीमतों में कमी से अर्थव्यवस्था के दीर्घ स्थिरीकरण में नाटकीय सुधार आया। जैसा कि अरुण जेटली ने कई बार कहा भी था कि भारत जल्द ही नाजुक अर्थ व्यवस्था से एक मजबूत और उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। आंकड़े उनकी बात को साबित करते हैं...
विषय                                       FY14         FY19
GDP इजाफा (%)                      6.4             7.0
राजकोषीय घाटा (GDP %)          4.5             3.4
मुद्रास्फीति (CPI)                       9.5             2.92 (अप्रैल 2019 तक)

एफडीआई उदारीकरण : एफडीआई का मामला पूरी तरह से अरुण जेटली के मंत्रालय के अधीन नहीं आता था, बावजूद उन्होंने एफडीआई उदारीकरण (FDI Liberalisation) की दिशा में काफी काम किया। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा विदेशी पूंजी निवेश लाने के लिए रक्षा, बीमा और उड्डयन सेक्टर समेत कई अन्य क्षेत्रों में FDI का रास्ता खोल दिया।
ऐसे बढ़ा FDI
वित्त वर्ष      $ (अरब में)
FY14         24.3
FY15         29.7
FY16         40.0
FY17         43.5
FY18         44.9
FY19         44.4

बजट में सुधार (Budget Reforms) : सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले सालाना बजट के प्रस्तुतिकरण में सुधार किया। रेलवे बजट को अलग से पेश करने की परंपरा को खत्म कर उसे आम बजट का हिस्सा बनाया गया। बजट भाषण से बहुत सी गैर-जरूरी चीजों को हटाकर उसके प्रस्तुतिकरण का समय कम किया गया है। इससे पहले तक रेलवे का अलग बजट होता था जो अलग से संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता था।

अरुण जेटली के अन्य महत्वपूर्ण फैसले
- शुगर सेक्टर में सुधार लाने और किसानों का बकाया भुगतान कराने व शुगर मिल मालिकों को कर्ज के बोझ से बाहर निकालने के लिए 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा के पैकेज की घोषणा की। साथ ही कर्ज में फंसे शुगर मिल मालिकों को उनके बकाया ब्याज की राशि में छूट प्रदान की गई।
- देशभर में राज्य सरकारों के पास हवाई पट्टी तो है, लेकिन एयरपोर्ट नहीं है। हवाई यात्रा का दायरा बढ़ाने के लिए सरकार ने सभी बड़े जिलों में एयरपोर्ट को मंजूरी प्रदान की। हवाई यात्रा की सुविधाओं में विस्तार के लिए सरकार ने 4500 करोड़ रुपये के फंड को मजूरी दी। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा आसानी से और अपने नजदीक मिल सकेगी। 2020 तक सभी नए एयरपोर्ट को शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
- पूर्व सैनिकों की हेल्थ सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया। इससे 45 हजार से ज्यादा सैनिकों लाभांवित होंगे।
- मुंबई शहरी परिवहन परियोजना चरण 3A के विस्तार को मंजूरी दी। इसके तहत 54,777 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक और विस्तारित किया जाना है।
- अरुण जेटली ने जुलाई 2014 में अपना पहला बजट पेश करते हुए आयकर छूट की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गई। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी आयकर छूट की सीमा को ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दिया गया। पहले ही बजट में उनके इस फैसले ने महंगाई की मार से जुझ रहे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत प्रदान की थी।
- पहले बजट में ही अरुण जेटली ने सेक्शन 80(C) के तहत निवेश में कर छूट की सीमा को 1,10,000 रुपये से बढ़ाकर 1,50,000 रुपये कर दिया था। छोटे निवेशकों के लिए बड़ा तोहफा था।
- घर खरीदारों को भी अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में ही बड़ी राहत देने का प्रयास किया था। उन्होंने होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा को डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया था।
- दूसरे बजट (2015-16) में अति बुजुर्गों के इलाज पर मिलने वाली छूट की सीमा 60,000 रुपये से बढ़ाकर 80,000 रुपये कर दिया गया।
- तीसरे बजट (2016-17) में आयकर दाताओं को मौका दिया गया कि वह आय घोषणा योजना 2016 के तहत पिछले गैर-अनुपालन सही करा लें। एक जून 2016 से लागू इस योजना में 30 फीसद टैक्स और 15 प्रतिशत जुर्माना देकर कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए चार महीने का समय दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने ये भी घोषणा की कि कालेधन के साथ पकड़े जाने वालों को टैक्स के साथ 90 फीसद पेनाल्टी देनी होगी। इन चार माह के भीतर गैर-अनुपालन वाली आय घोषित करने में विफल रहने पर सात साल तक की सजा हो सकती है।
- चौथे बजट (2017-18) में ढाई लाख से पांच लाख रुपये सालान कमाने वाले लोवर मिडिल क्लास आयकर दाताओं को राहत देते हुए आयकर दस फीसद से घटाकर पांच फीसद कर दिया गया।

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Posted By: Amit Singh

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