नई दिल्ली, प्रेट्र। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) रंजन गोगोई से जुड़े हालिया विवाद के मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को सलाह दी कि झूठा आरोप लगाने वालों पर ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए जो उदाहरण बने। जेटली ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'यह न्यायपालिका के साथ खड़ा होने का समय है।'

जेटली ने कहा, 'व्यक्तिगत शालीनता, मूल्यों, नैतिकता और ईमानदारी के मामले में भारत के वर्तमान चीफ जस्टिस बेहद सम्मानीय हैं। आरोप अपुष्ट हैं और इसे लगाने वाली का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। इससे जाहिर होता है कि सीजेआइ नामक संस्थान को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने आगे लिखा, 'झूठ के जरिये संस्थान को बदनाम करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ यदि ऐसी कार्रवाई नहीं की जाती जो उदाहरण बने तो इससे ऐसी परिपाटी तेज होगी।'

वित्त मंत्री ने लिखा, 'किसी अधिकारी पर लगाए जाने वाले ऐसे मामलों को उचित समिति के पास भेजा जाता है। अगर शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की कॉपी दूसरे जज और मीडिया को बांटते हुए मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करती है तो इसे सामान्य केस की तरह खत्म कर देना चाहिए।'

जेटली ने लिखा, 'जब चार डिजिटल मीडिया संस्थान एक ही तरह के प्रश्न चीफ जस्टिस को भेजते हैं तो यह साफ हो जाता है कि जो हम देख और समझ रहे हैं, मामला उससे कहीं ज्यादा है।' उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली एक कर्मचारी ने गत दिनों सीजेआइ पर अमर्यादित आचरण के आरोप लगाए हैं।

वामपंथी विचारधारा के हैं अस्थिरता पैदा करने वाले

जेटली ने लिखा, 'अस्थिरता पैदा करने वाली ताकतों में बड़ी संख्या में वामपंथी या अति वामपंथी विचारधारा के हैं। इनका न तो कोई चुनावी वजूद है न ही जनसमर्थन। इसके बावजूद ये लोग मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों में असमानुपातिक रूप से अब तक मौजूद हैं। जब इन्हें मीडिया की मुख्यधारा से बेदखल कर दिया गया तो इन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया का सहारा ले लिया..'

कांग्रेस को भी लिया आड़े हाथ

मंत्री ने लिखा, 'यह अफसोसजनक है कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े बार के सदस्यों का एक वर्ग अस्थिरता पैदा करने वाले लोगों को समर्थन देता है। जज के खिलाफ महाभियोग और यहां तक कि चीफ जस्टिस के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए लगातार सांसदों से संपर्क किया जाता है।'

Posted By: Tanisk

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