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Koo Studio चुनावी तर्क वितर्क- विधानसभा चुनावों में जनादेश का विश्लेषण, जानें कैसा होगा आगे का रोडमैप

पांचों राज्‍यों में विधानसभा चुनावों में जो परिणाम सामने आए हैं उनसे भारतीय राजनीति की पूरी तस्‍वीर साफ हो गई है। ऐसे में राजनीति पार्टियों को अब अपनी पुरानी रणनीति पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। अगर ऐसा नहीं किया तो अगामी चुनावों में भी ऐसे ही परिणाम सामने आएंगे।

By TilakrajEdited By: Published: Sat, 12 Mar 2022 02:02 PM (IST)Updated: Sat, 12 Mar 2022 02:02 PM (IST)
भारतीय राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और पार्टियों को इसे समझना होगा।

पांच राज्यों में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। पूरे चुनावों पर न सिर्फ इन पांच राज्यों बल्कि पूरे देश की नजर थी। इन चुनावों में खास बात यह रही कि जनता ने गोवा छोड़कर हर राज्य में स्पष्ट जनादेश दिया है। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि जनता मिली जुली सरकार की जगह एक स्पष्ट बहुमत की मजबूत सरकार बनाना चाहती है। साथ ही हर राज्य के नेतृत्व को लेकर भी आम लोगों के मन में कोई भ्रम नहीं था।

हालांकि विधानसभा चुनावों का परिणाम आने के बाद एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी व आम आदमी पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की, तो वहीं कई पार्टियों के लिए चौंकाने वाले नतीजे भी सामने आए। कांग्रेस, बसपा, अकाली दल जैसी धुरंधर पार्टियों की भारी असफलता ने राजनीतिक एक्सपर्ट्स को भी सोचने पर विवश किया है। इस स्पष्ट जनादेश के बाद अब आगे ये पार्टियां क्या रणनीति अपनाती हैं व इनका आगे का रोडमैप क्या होगा, इन सभी मुद्दों पर Koo Studio चुनावी तर्क वितर्क के इस एपिसोड में चर्चा की गई। इस एपिसोड में पॉलिटिकल एनालिस्ट व फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट Dr. Bharti Chhibber और Jagran New Media के एग्जक्यूटिव एडिटर Pratyush Ranjan ने जनता के जनादेश व आगे के रोडमैप पर चर्चा किया।

इस विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय व स्थानीय दोनों मुद्दों पर चुनाव लड़ा गया। जिसमें स्थानीय मुद्दों में महिला सुरक्षा, विधवा पेंशन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे तो वहीं राष्ट्रवाद के राष्ट्रीय मुद्दे का भी लाभ सीधे भाजपा को मिला। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ सालों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई जब विदेश में रह रहे भारतीयों को भारत में वापस लाना आवश्यक हो गया। जिस पर सरकार अपने नागरिकों को वापस लाने में सफल रही। इसका ताजा उदाहरण रूस यूक्रेन युद्ध है। इसके पहले अफगानिस्तान संकट के समय में भी सरकार ने वहां रह रहे भारतीयों को सुरक्षित निकालने का काम किया था। ऐसे कदम निश्चित तौर पर जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता को बढ़ाते हैं।

इस विधानसभा चुनावों में पंजाब ने सबसे चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। पंजाब में न सिर्फ पार्टी ने एक विशाल जीत दर्ज की है बल्कि विपक्षी पार्टियों के कई कद्दावर नेताओं को भी हराया है। जिसमें वर्तमान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम प्रमुख है, इसके अतिरिक्त अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल व सुखवीर सिंह बादल जैसे दिग्गज भी चुनाव हार गए। आम आदमी पार्टी इस चुनाव में दिल्ली मॉडल को साथ लेकर जनता के बीच पहुंची। इन्होंने अपनी तैयारी भी 2019 से शुरू कर दी थी। जिसका प्रमाण आम आदमी पार्टी के घोषणा पत्र में दिखाई देता है। जिसमें कृषि के मुद्दे को प्राथमिकता भी दी गई थी, साथ ही सरकारी स्कूलों, मोहल्ला क्लीनिक व ड्रग्स की समस्या को भी अपने घोषणा पत्र में जगह दी।

इस चुनाव में खासतौर पर उत्तर प्रदेश भाजपा की सफलता का मुख्य कारण योगी मोदी फैक्टर रहा है। जिसमें योगी के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया व मोदी का उन्हें समर्थन प्राप्त हुआ। योगी एक सख्त प्रशासक रहे हैं और आगे भी वो अपनी इसी छवि को लेकर चलेंगे। उनके ऊपर होने वाले सभी हमलों का अकेले योगी ने जवाब दिया है। इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री का चेहरा रहे पुष्कर सिंह धामी खुद अपनी सीट नहीं बचा पाए। लेकिन अपने नेतृत्व में चुनाव जिताकर धामी ने अपना प्रभुत्व स्थापित किया है। जिसका लाभ निश्चित तौर पर उनको मिल सकता है।

साथ ही मणिपुर में भी भाजपा ने एकतरफा जीत प्राप्त की व गोवा में मुकाबला काफी रोचक रहा। इन सभी राज्यों के परिणाम से एक बात तो तय है कि कांग्रेस कहीं न कहीं अपनी जमीन खो चुकी है जिसे प्राप्त करने के लिए उसे कड़ा संघर्ष व परिवर्तन करने होंगे। इसके अतिरिक्त आगे के रोडमैप को लेकर और भी कई महत्वपूर्ण बातें साझा की गयी जिसे आप इस वीडियो में देख सकते हैं-

साथ ही विभिन्न राज्यों के चुनावों का सटीक विश्लेषण देखने के लिए फॉलो करें @dainikjagran को Koo ऐप पर।


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