नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के युवकों से दोस्तों और परिवार के साथ अपनी भाषा में बातचीत करने की अपील की। गृह मंत्री ने कहा है कि देश की संस्कृति तभी सुरक्षित रह सकती है, जब उसकी भाषाएं सुरक्षित रहें। हम पर जिम्मेदारी है कि जो हजारों साल से जिस संस्कृति का प्रवाह अनवरत रूप से मिला है। उसे और हजारों साल तक आगे ले जाने के लिए हमें प्रयास करना चाहिए। 

उन्‍होंने कहा कि भारत की संस्कृति को सिर्फ सांस्कृतिक कारणों से चिंरजीव बनाना जरूरी नहीं है, मैं ये मानता हूं कि दुनिया की ढेर सारी समस्याओं का समाधान हमारी संस्कृति में विद्यमान है। इसलिए हमारी संस्कृति का संरक्षण जरूरी है। उन्‍होंने कहा कि हमारी परंपरा में वेदों में कहा गया है कि दुनिया की सभी दिशाओं से अच्छे विचार हमें मिले, हम सब अच्छे विचारों को ग्रहण करें और दुनिया की उन्नति के लिए काम करें, ये हमारी संस्कृति का मूल विचार है।  

भारत की संस्कृति को सिर्फ सांस्कृतिक कारणों से चिंरजीव बनाना जरूरी नहीं है, मैं ये मानता हूं कि दुनिया की ढेर सारी समस्याओं का समाधान हमारी संस्कृति में विद्यमान है। इसलिए हमारी संस्कृति का संरक्षण जरूरी है: श्री @AmitShah pic.twitter.com/YtopXNWlJG

भाषाएं एवं बोलियां हमारे देश की पहचान

शाह ने कहा कि भारत दुनिया में अकेला ऐसा देश है जो अपनी संस्कृति से एकजुट है। उन्होंने कहा कि देश के पास कई भाषाएं और बोलियां हैं। एक राज्य में ही सात से आठ भाषाएं हैं। पूर्वोत्तर में 150 बोलियां हैं और ये भाषाएं एवं बोलियां हमारे देश की पहचान हैं।

यदि भाषा सुरक्षित है तो उसका इतिहास भी सुरक्षित है

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा, 'जब भी आपको अपने मित्रों, परिवार या माता-पिता से बातचीत करनी हो तो आप अपनी भाषा में करें। अपनी भाषा को जीवित रखने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है।' उन्होंने कहा कि भाषा की रक्षा जरूरी है, क्योंकि यदि भाषा सुरक्षित है तो उसका संगीत सुरक्षित है और उसका इतिहास भी सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह कई विदेशियों से मिले जिन्हें अपनी मूल भाषा का पता ही नहीं था। 50 साल बाद हम ऐसी स्थिति का सामना नहीं करें।

उन्‍होंने कहा कि हर देश की पहचान उसकी सीमाओं, भूगोल और उसकी राज्य व्यवस्था के आधार पर होती है। भारत दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जो जियोपालिटिकल (Geopolitical) देश नहीं है, जियोकल्‍चरल (Geo-Cultural) देश है। गुलामी के इतने लंबे कालखंड के बाद भी हम अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाते रहे हैं। 

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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