नई दिल्ली, पीटीआइ। राष्ट्र ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर रविवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। इस अवसर पर देश-विदेश में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण अवसर पर कहा, 'देश के लोग आखिरकार यह संतोष महसूस कर रहे हैं कि नेताजी के योगदान को वह मान्यता दी जा रही है, जिसके वह इस सरकार के तहत हकदार हैं।'

प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक फैसला लिया

अमित शाह ने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढि़यों को कई वर्षों तक शौर्य, राष्ट्रभक्ति और बलिदान के लिए प्रेरित करती रहेगी क्योंकि यह सिर्फ ग्रेनाइट से बनी प्रतिमा नहीं होगी बल्कि देश के करोड़ों लोगों के मन में नेताजी के प्रति भावनाओं की अभिव्यक्ति होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है कि गणतंत्र दिवस समारोह 23 जनवरी से ही प्रारंभ हुआ करेंगे। इससे पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मातृभूमि के लिए नेताजी का अतुलनीय बलिदान, तप और संघर्ष हमेशा देश का मार्गदर्शन करता रहेगा।

रक्षा मंत्री बोले- एतिहासिक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने होलोग्राम प्रतिमा के अनावरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और इस दिन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि नेताजी जैसे शक्तिशाली राष्ट्रीय नायक का सम्मान सभी भारतीयों के लिए गर्व और खुशी की बात है।

राष्‍ट्रपति ने कही यह बात

वहीं राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि भारत की आजादी (आजाद हिंद) के सपने को पूरा करने के लिए नेताजी द्वारा उठाए गए साहसिक कदम उन्हें एक राष्ट्रीय नायक बनाते हैं। उनके आदर्श और बलिदान सदैव प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करते रहेंगे।

'महात्मा गांधी के आंदोलन से नहीं, आजाद हिंद फौज के कारण मिली आजादी'

सुभाष चंद्र बोस के भतीजे अर्धेदु बोस ने कहा कि वह सपने में भी यह नहीं सोच सकते थे कि नेताजी की प्रतिमा राजपथ पर उस छतरी के नीचे लगेगी जहां किंग जार्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी। उन्होंने कहा कि भारत को आजादी महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन से नहीं, बल्कि आजाद हिंद फौज की गतिविधियों की वजह से मिली थी और इंग्लैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट रिचर्ड एटली ने इसे स्वीकार भी किया था। नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ ने कहा, 'मेरे पिता ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जहां सभी धर्मो के लोगों का शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व हो। प्रतिमा, नेताजी को एकमात्र श्रद्धांजलि नहीं होनी चाहिए। हमें उनके मूल्यों का भी सम्मान करना चाहिए।' 

Edited By: Krishna Bihari Singh