नई दिल्ली, जेएनएन। आखिरकार पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के बीच मुलाकात हो ही गई। लेकिन इससे भी उल्लेखनीय यह है कि अमरिंदर कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन से भी मिले। यह वही हरजीत सिंह हैं जो जब पिछले साल अप्रैल में भारत यात्रा पर आए थे तो अमरिंदर ने उन्हें खालिस्तानी समर्थक करार देते हुए मिलने से इन्कार कर दिया था। अमिरंदर सिंह ने कनाडा सरकार के एक और सिख मंत्री के बारे में भी वैसे ही विचार व्यक्त किए थे, जैसे कि हरजीत के बारे में।

ज्ञात हो कि कनाडा सरकार में चार सिख मंत्री हैं। अमरिंदर ने जस्टिन ट्रुडो से मुलाकात के बाद कहा कि उन्होंने उनके समक्ष कनाडा में खालिस्तानियों को मिल रहे संरक्षण का सवाल उठाया। उनके प्रेस सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कनाडा में रह रहे ऐसे नौ लोगों की सूची भी ट्रुडो को सौंपी जो पंजाब में नफरत फैलाने के साथ आतंकी गतिविधयों को बढ़ावा देने के लिए धन और हथियार भेजने का भी काम कर रहे हैं।

अमरिंदर ने जस्टिन ट्रुडो से अपनी मुलाकात के बारे में तो ट्वीट किया है, लेकिन हरजीत सिंह से मुलाकात के बारे में कोई ट्वीट नहीं किया। उन्होंने ट्वीट के साथ तीन फोटो भी अपलोड की हैं, लेकिन किसी में भी हरजीत नहीं दिख रहे हैं।

अमरिंदर सिंह और कनाडा सरकार के बीच तनातनी तबसे चली आ रही है जब अमरिंदर पंजाब विधानसभा चुनाव के मौके पर चुनाव प्रचार के लिए कनाडा गए थे। तब उन्हें चुनाव प्रचार करने से रोक दिया गया था। अमरिंदर का मानना था कि इस रोक के पीछे हरजीत सिंह सज्जन का हाथ है। उन्होंने खुद को चुनाव प्रचार से रोके जाने पर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रुडो को एक सख्त चिट्ठी भी लिखी थी।

अमरिंदर सिंह कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि जस्टिन ट्रुडो सरकार कनाडा में रह रहे खालिस्तानी समर्थकों को संरक्षण दे रही है। ऐसे आरोपों के बाद ही इसे लेकर संशय था कि जस्टिन ट्रुडो के पंजाब आगमन पर वह उनसे मिलेंगे या नहीं? अंततः वह जस्टिन ट्रुडो से भी मिले और हरजीत सिंह सज्जन से भी। हरजीत सिंह सज्जन के पिता पंजाब पुलिस में हवलदार थे। वह तब कनाडा चले गए थे जब हरजीत पांच साल के थे। हरजीत ने कनाडा में पढ़ाई करने के बाद वहां की पुलिस और सेना में सेवाएं दीं। इसके बाद वह लिबरल पार्टी में शामिल हो गए और चुनाव जीतने के बाद जस्टिन ट्रुडो सरकार में मंत्री बन गए। हालांकि वह खालिस्तान समर्थक होने से इन्कार करते हैं, लेकिन उन पर आरोप इसलिए लगते रहे हैं, क्योंकि वह उस वर्ल्ड सिख काउंसिल से जुड़े थे जिसके कई सदस्य खुले आम खालिस्तान की मांग करते रहे हैं।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जस्टिन ट्रुडो से मुलाकात के दौरान कनाडा में खालिस्तानियों को मिल रहे संरक्षण का सवाल उठा सकते हैं। जो भी हो, यह दिलचस्प है कि मोदी और ट्रुडो के बीच संवाद-संपर्क के पहले कनाडा में यह चर्चा गर्म है कि मोदी सरकार भारत यात्रा पर गए जस्टिन ट्रुडो को उचित सम्मान नहीं दे रही है। जस्टिन ट्रुडो के साथ भारत आए कनाडाई पत्रकार यह शिकवा कर रहे हैं कि किस तरह ट्रुडो के स्वागत में एक जूनियर स्तर के मंत्री को भेजा गया औऱ मोदी न तो उनकी अगवानी करने हवाईअड्डे गए और न ही उनके नई दिल्ली आगमन पर कोई ट्वीट किया। इसका भी उल्लेख किया जा रहा है कि जस्टिन ट्रुडो के आगरा जाने के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री उनसे नहीं मिले जबकि वह इजरायली पीएम से जाकर मिले थे।

देखना है कि जस्टिन ट्रुडो की अहमदाबाद यात्रा के वक्त मुख्यमंत्री विजय रुपाणी, मुंबई यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और अब पंजाब यात्रा के दौरान अमरिंदर सिंह से मुलाकात के बाद कनाडाई मीडिया में इन बातों पर विराम लगता है या नहीं कि भारत में उनके पीएम की कथित तौर पर उपेक्षा की जा रही है, लेकिन सच यह है कि प्रोटोकाल के तहत उन्हें उतना ही सम्मान दिया गया जितना अन्य शासनाध्यक्षों को दिया जाता है। कई देशों में राजदूत रहे विवेक काटजू का कहना है कि ऐसे आरोप अज्ञानता की उपज हैं कि जस्टिन ट्रुडो के साथ रुखा व्यवहार किया गया। उनके मुताबिक जस्टिन ट्रुडो की उपेक्षा के बेजा सवाल शायद इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी करने के पहले भारत भ्रमण करना बेहतर समझा। उनके अनुसार आमतौर पर होता यह है कि विदेशी शासनाध्यक्ष किसी देश में जाने के बाद आधिकारिक कार्यक्रम पूरे करने के उपरांत ही अन्य आयोजनों में शामिल होने या घूमने का काम करते हैं। 

Posted By: Tilak Raj

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