अलवर/नई दिल्ली (एएनआइ)। अलवर लिंचिंग मामले को कांग्रेस राजनीति रंग देने से चूक नहीं रही है। 28 वर्षीय युवक की हत्या को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर ट्वीट करते हुए राहुल ने युवक की मौत पर सवाल उठाए हैं।

राहुल का ट्वीट, निशाने पर पुलिस

उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'पुलिसवालों ने मरने की हालात में मौजूद रकबर खान (लॉब लिंचिंग का शिकार) को अस्पताल तक पहुंचाने में तीन घंटे का समय लगाया। जबकि अस्पताल केवल छह किलोमीटर की दूरी पर था। क्यों? उन्होंने रास्ते में चाय का ब्रेक लिया हुआ था। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा

दरअसल, अलवर लिंचिंग मामले में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि गायों को गौशाला पहुंचाने में से ज्यादा वक्त रकबर को अस्पताल पहुंचाने में लगा है। आरोप है कि जब रकबर को अलवर जिले के रामगढ़ स्थित सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, उस वक्त सुबह के चार बज रहे थे, जबकि घटनास्थल से अस्पताल की दूरी मात्र पांच से छह किलोमीटर ही है।

रिपोेर्ट सत्य हुई, तो करेंगे सख्त कार्रवाई : कटारिया

इस बीच राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने मीडिया रिपोर्ट्स को सत्य पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने कहा, 'कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पीड़ित को अस्पताल ले जाने में पुलिस ने देरी की थी। हम इस जानकारी को सत्यापित करेंगे और यदि यह जानकारी सत्य पाई गई, तो हम जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।'

क्या है अलवर लिंचिंग मामला

राजस्थान के अलवर में 28 वर्षीय युवक की कुछ लोगों के समूह ने गौ तस्करी के संदेह में पीट-पीट कर मार डाला। हरियाणा के कोलगांव का निवासी रकबर खान और उसका एक अन्य साथी अपने साथ दो गाय शुक्रवार की रात अलवर जिले में लालवंडी गांव के पास के जंगलों से लेकर जा रहे थे। कुछ लोगों की नजर उन पर पड़ी, जिसके बाद रकबर को उन्होंने पीट-पीट कर मार डाला। इस बीच अलवर के एएसपी अनिल बेनीवाल ने इस पूरे मामले पर कहा, 'यह स्पष्ट नहीं है कि वह गौ तस्करी कर रहा था।

मॉब लिंचिंग पर SC सख्त

हाल ही में लॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाते हुए कहा था कि राज्य सरकारों संविधान के मुताबिक काम करें। साथ ही राज्य सरकारों को लिंचिंग रोकने से संबंधित गाइडलाइंस को चार हफ्ते में लागू करने का भी आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि इसको रोकने के लिए विधायिका कानून बनाए। बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी।

Posted By: Nancy Bajpai

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