नीलू रंजन, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों और एक मंत्री पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाले सीबीआइ के डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले में सीबीआइ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर विचार कर रही है, लेकिन कोई भी कदम सुप्रीम कोर्ट का रूख देखने के बाद ही उठाया जाएगा। मनीष कुमार सिन्हा की अर्जी में लगाए आरोपों के सुनवाई के पहले ही मीडिया में बांटे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त नाराजगी जताई है।

डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर विचार

डीओपीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकारी अधिकारी का अपने अधिकारों की मांग को लेकर अदालत में जाना कोई नई बात नहीं है। इसकी खुली छूट है, लेकिन सरकार के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। यह सेवा नियमावली का सीधा उल्लंघन है। इसके लिए विभाग संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी कर सफाई मांग सकता है और सफाई से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई भी कर सकता है। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में विचार-विमर्श किया जा रहा है। कानूनी सलाह के बाद ही उचित कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख देखने के बाद हो सकता है फैसला

दरअसल मनीष कुमार सिन्हा ने नागपुर में अपने तबादले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में एनएसए अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा, सीवीसी केवी चौधरी, विधि सचिव सुरेश चंद्रा और कोयला व खदान राज्यमंत्री हरीभाई पारथीभाई चौधरी पर गंभीर आरोप लगाया था। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से किसी के साथ भी उसकी कोई बातचीत नहीं हुई है और सारे आरोप दूसरों के बयान के हवाले से लगाए गए हैं।

इन आरोपों को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत होने के संबंध में पूछे जाने पर सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिर्फ किसी का बयान किसी के खिलाफ आरोप लगाने का आधार नहीं बन जाता है, इसके लिए शिकायत और जांच की पूरी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाने को कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है और इस पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।

Posted By: Bhupendra Singh

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