यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ayodhya land dispute case: मुस्लिम पक्ष ने पांच दिन सुनवाई पर जताई आपत्ति, धवन ने दी यह दलील
Ayodhya land dispute case मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि केस में मुझे बहुत रिसर्च करनी होगी ...और पढ़ें

माला दीक्षित, नई दिल्ली। Ayodhya land dispute case अयोध्या जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज चौथे दिन भी सुनवाई हुई। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने मामले में हफ्ते के पांच दिन सुनवाई पर अदालत से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया। राजीव धवन ने कहा कि केस में मुझे बहुत रिसर्च करनी होगी, पढ़ना होगा। ऐसे में रोज सुनवाई पर दलीलों में रहने में असमर्थ हूं। धवन की इस बात पर शीर्ष अदालत ने कहा कि हमने आपकी बात सुन ली है, इस बारे में आपको बता दिया जाएगा।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने निर्मोही अखाड़ा से दस्तावेज से जुड़े सबूतों पर अपना अधिकार साबित करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या आपके पास कुर्की से पहले राम जन्मभूमि के कब्जे का मौखिक या लिखित सबूत रिकॉर्ड में है। इसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि साल 1982 में एक डकैती हुई थी, इसमें रिकॉर्ड खो गए थे।
बता दें कि बीते दिनों रामलला विराजमान की ओर से भी राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक का दावा पेश किया गया था। रामलला विराजमान की ओर से कहा गया था कि लाखों भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास यह साबित करने के लिए काफी है कि अयोध्या में यह स्थल भगवान राम का जन्मस्थान है। कोर्ट घोषित करे कि पूरी जन्मभूमि भगवान राम की है और भगवान रामलला को ही उसका कब्जा दे दिया जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों के वकीलों से अपना-अपना दावा साबित करने से जुड़े कई सवाल किए और सबूत मांगे थे।
सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपीलें, तीन रिट पीटिशन और एक अन्य याचिका लंबित है। सुनवाई की शुरूआत मूल वाद संख्या 3 और 5 से होगी। मूल वाद संख्या तीन निर्मोही अखाड़ा का मुकदमा है और मूल वाद संख्या पांच भगवान रामलला विराजमान का मुकदमा है। कोर्ट ने बीते शुक्रवार को मामले में बहस करने वाले वकीलों और पक्षकारों से कहा था कि जिन साक्ष्यों और दलीलों यानी केस ला आदि को वे कोर्ट में पेश करने वाले हैं उसके बारे में पहले से बता दें ताकि कोर्ट स्टाफ उसे कोर्ट के सामने पेश करने के लिए तैयार रखें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। जिसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान, दूसरा निर्मोही अखाड़ा एवं तीसरा हिस्सा सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को देने का आदेश था। इस फैसले को भगवान राम सहित हिन्दू मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में ये अपीलें 2010 से लंबित हैं और कोर्ट के आदेश से फिलहाल अयोध्या में यथास्थिति कायम है।
