नई दिल्‍ली [संजय मिश्र]। संसद भवन में पहली बार एक विशेष तरह का कॉल सेंटर स्थापित होने वाला है। 24 घंटे काम करने वाला ये कॉल सेंटर बेहद खास होगा। इस कॉल सेंटर के जरिए सांसदों को हर तरह की जानकारी और मदद प्राप्त हो सकेगी। इससे उन्हें अपने क्षेत्र में काम करना तो आसान होगा ही, साथ ही उन्हें विकास योजनाएं बनाने, भाषण तैयार करने और नई-नई योजनाओं से अपडेट रहने की भी सुविधाएं मिलेंगी। इतना ही नहीं सांसद ये भी जान सकेंगे कि वो क्या काम कर सकते हैं और क्या नहीं?

दरअसल, संसद ने अब माननीयों को नये दौर की रफतार से जोड़ने की पहल करते हुए सांसदों के लिए एक विशेष कॉल सेंटर बनाने की शुरूआत की गई है। देश में पहली बार इस तरह का कॉल सेंटर स्थापित किया जा रहा है। 24 घंटे और सातों दिन काम करने वाला यह कॉल सेंटर सांसदों को उनके विशेषाधिकार और सुविधाओं की तत्‍काल जानकारी उपलब्‍ध कराएंगा। साथ ही किसी आपात स्थिति का सामना कर रहे माननीयों को तुरंत परिस्थितिजन्‍य हालतों से निपटने के लिए समाधान की राह भी सुझाएंगे।

संभावित सवालों के तैयार किए जा रहे जवाब

लोकसभा सचिवालय ने माननीयों के इस विशेष कॉल सेंटर का आगाज करने से पहले इसके लॉजिस्टिक प्रबंधन की व्‍यवस्‍था पर काम करना शुरू कर दिया है। सूत्रों ने बताया कि सियासत के हाई-प्रोफाइल लोगों को इस तरह की चौबीसों घंटे सेवा देने से पहले ऐसे संभावित सैकड़ों सवाल और आपात हालातों के मौजूदा संदर्भों का अध्‍ययन कर इनके जवाब तैयार किए जा रहे हैं। ताकि माननीयों को उनके अधिकांश सवालों और समस्‍याओं का समाधान कॉल सेंटर की ओर से तत्‍काल दिया जा सके। जबकि कुछ ऐसे सवाल जिनमें राज्‍य और केंद्र सरकार की एजेंसियों से लेकर जिला प्रशासन के तंत्र शामिल हैं, उसका भी समाधान माननीयों को चंद मिनटों के अंदर उपलब्‍ध कराने की कॉल सेंटर की तैयारी है।

सांसदों से उनके सवाल व समस्याओं का लिया जा रहा ब्योरा

लोकसभा के एक वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार कॉल सेंटर की रिस्‍पांस क्षमता बढाने के लिए सचिवालय के सभी ब्रांचों से माननीयों की ओर से उनके यहां आने वाले सवालों और समस्‍याओं के साथ उनकी प्रकृति का ब्‍यौरा मांगा गया है। जबकि नेशनल इनफॉरमेशन सेंटर, कॉल सेंटर का पूरा आइटी और साफ्टवेयर ढांचा विकसित कर रहा है। ताकि सामान्‍य प्रकृति और नियम-कानूनों से जुडे सवालों का जवाब पहले से ही तैयार रहे और माननीयों को इसकी जानकारी पल भर में ही उनके मोबाइल पर मिल जाए। मसलन सांसदों को उनके वेतन-भत्ते और सुविधाओं से जुड़ी किसी तरह की जानकारी हो या उनके क्‍या विशेषाधिकार हैं। साथ ही किस तरह का बर्ताव उनके विशेषाधिकार का हनन माना जाएगा।

सबसे अहम है सांसद निधि का मसला

संसदीय सचिवालय का विश्लेषण है कि सांसदों के लिए उनकी सांसद निधि का मसला सबसे अहम और संवेदनशील मसलों में एक है। इसीलिए कॉल सेंटर में एमपीलैड स्‍कीम के कार्यान्‍वयन के तौर तरीकों से लेकर इसके तहत चल रहे कामों के ताजातरीन अपडेट की जानकारी भी सांसदों को तत्‍काल देने की तैयारी चल रही है। इतना ही नहीं संसद में पेश हो चुके विचाराधीन विधेयकों और विधायी प्रस्‍तावों से जुडी जानकारियां हो या फिर किसी मौजूदा कानून से जुडे सवाल, माननीयों को यह कॉल सेंटर फटाफट अपडेट देगा।

लोकसभा अध्यक्ष ने दिया था सुझाव

मालूम हो कि संसद के बीते बजट सत्र के बाद लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिडला ने माननीयों के लिए ऐसा कॉल सेंटर बनाने की बात कही थी। स्‍पीकर ने इसके जरिये सांसदों को ज्‍वलंत मुददों से जुड़ी जानकारियां मुहैया कराने की संभावनाओं पर गौर करने की बात कही थी ताकि माननीय सदन में अपने भाषण की तैयारी में इन सूचनाओं का उपयोग कर सकें।

Posted By: Amit Singh

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