संयुक्त राष्ट्र, प्रेट्र/आइएएनएस। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिका में कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से जंग का नेतृत्व करने का इच्छुक है। जलवायु परिवर्तन खासतौर से विकासशील देशों के समक्ष विकास संबंधी चुनौतियां पेश कर रहा है।

धरती हमारी मां

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें अधिवेशन से इतर बुधवार को जलवायु परिवर्तन मसले पर हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री ने कहा, 'भारत जलवायु परिवर्तन से जंग की अगुवाई करने के लिए तैयार है। जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने की हमारी प्रतिबद्धता हमारे स्वभाव में है। हम धरती को मां मानते हैं।' उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में अक्षय ऊर्जा उत्पादन के मामले में छठा और सौर ऊर्जा का पांचवा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

केरल का एयरपोर्ट बना उदाहरण

जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए भारत ने साल 2022 तक 175 गीगा वाट सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा बनाने का लक्ष्य रखा है। भारत ने 30 करोड़ एलईडी बल्ब लगाए हैं। इससे दो करोड़ डॉलर (करीब 14 हजार 500 करोड़ रुपये) और चार गीगा वाट बिजली की बचत हुई। सुषमा ने केरल के कोच्चि एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा से संचालित यह दुनिया का पहला एयरपोर्ट है।

अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरानी विदेश मंत्री से चर्चा

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को न्‍यूयार्क में अपने ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच प्रमुख तेल निर्यातक ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों समेत द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई। अमेरिका इन प्रतिबंधों को नवंबर से प्रभावी करने की तैयारी में है।

उसने भारत समेत दुनिया के अन्य देशों से कहा है कि वे चार नवंबर से ईरान से तेल आयात करना पूरी तरह बंद कर दें। ऐसा नहीं करने पर प्रतिबंधों का सामना करने की चेतावनी भी दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के अनुसार, सुषमा और जरीफ ने कई मसलों पर एक-दूसरे के रुख को साझा किया। जरीफ ने परमाणु करार को लेकर यूरोपीय संघ के साथ चल रही वार्ता की जानकारी भी साझा की।

Posted By: Prateek Kumar

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