style="text-align: justify;"> नई दिल्‍ली, जेएनएन। ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रोहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 15 फरवरी को भारत आ रहे हैं। वह तीन दिन यानि 17 फरवरी तक भारत में रहेंगे। बुधवार को इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी। बताया जा रहा है कि अपनी यात्रा के दौरान, दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

राष्ट्रपति रौफानी की भारत यात्रा महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि पिछले साल दिसंबर में ईरान ने चाबहार बंदरगाह के पहले चरण को शुरू किया, जिसका भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक महत्व है। इस बंदरगाह के जरिए अब भारत को अफगानिस्‍तान और सेंट्रल एशिया के देशों में जाने के लिए पाकिस्‍तान से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।  
 
ईरान स्टुडेंट्स न्यूज एजेंसी (आईएसएनए) ने कहा, 'ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी 15 फरवरी को भारत पहुंचेंगे।' प्रमुख द्विपक्षीय तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अन्य भारतीय नेताओं के साथ गहन बातचीत के अलावा ईरान के राष्ट्रपति आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) को शनिवार को संबोधित करेंगे। अगस्त 2013 में कार्यभारत संभालने के बाद ईरान के सातवें राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है।
 
 
ईरान के राष्ट्रपति रोहानी के साथ तेल व गैस फील्ड खरीद पर होगी बात
पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, अब अगले कुछ हफ्तों के दौरान अमेरिका के ऊर्जा सचिव रिक पेरी, ईरान के राष्ट्रपति रोहानी और सउदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी सउदी अरामको के मुखिया भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इन तीनों के साथ होने वाली बातचीत सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी हुई होगी। अभी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अगला कुछ हफ्ता काफी व्यस्त रहेगा। ईरान के राष्ट्रपति के साथ फरजान-बी ब्लाक, गैस पाइपलाइन समेत सभी मुद्दों पर बात होगी।
 
ईरान से ज्‍यादा तेल खरीदने को तैयार भारतीय कंपनियां
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी के साथ होने वाली बातचीत से उम्मीद की जानी चाहिए हाल के वर्षों में तेल व गैस क्षेत्र में आपसी रिश्तों में जो तनाव पैदा हुआ है वह खत्म हो जाएगा। भारत ने पिछले वर्ष ईरान से तेल खरीदने में काफी कटौती कर थी। इस पर ईरान ने ऐतराज जताते हुए भारतीय तेल कंपनी ओएनजीसी को फरजाद स्थित गैस ब्लाक में हिस्सेदारी देने की प्रक्रिया सुस्त कर दी है। अब माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच कुछ बीच का रास्ता निकल आया है तभी ईरान के राष्ट्रपति भारत की यात्रा पर आने को तैयार हुए हैं। भारतीय तेल कंपनियों ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि वे ईरान से ज्यादा तेल खरीदने को तैयार हैं। ऐसे में फरजाद-बी गैस ब्लाक में भारतीय निवेश को भी हरी झंडी मिलने के संकेत है।

Posted By: Tilak Raj