जेएनएन, नई दिल्ली। पाक की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकाना ध्वस्त करने की वायुसेना की रणनीति को मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमलीजामा पहनाया। वायुसेना, नौसेना के शीर्ष अधिकारियों से रणनीति पर चर्चा से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पल-पल की जानकारी देने तक में उनकी अहम भूमिका रही।

दरअसल, पुलवामा हमले के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को बदला लेने की पूरी छूट दी, तभी से अजीत डोभाल जुट गए थे। उन्होंने खुफिया विभाग और सेना के बीच समन्वय कर योजना की रूप रेखा तय की। उड़ी हमले के बाद 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के मुकाबले इस बार चुनौती और कड़ी थी क्योंकि पाकिस्तान ने पुलवामा हमले के तुरंत बाद अपनी सेना को अलर्ट कर दिया था। सीमा पर मौजूद लांचिंग पैड से आतंकियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था। इलाके में बर्फबारी भी परेशानी खड़ी कर सकती थी। सभी चुनौतियों पर विचार के बाद हवाई हमले की योजना बनाई गई और लक्ष्य आतंकी संगठनों के गढ़ और ट्रेनिंग कैंप बालाकोट को बनाया गया।

100 फीसद सफलता
डोभाल की रणनीति का अहम हिस्सा मिशन की 100 फीसद सफलता होती है। 2016 में उरी हमले के बाद जब भारत ने गुलाम कश्मीर में आतंकियों के लांचिंग पैड पर सर्जिकल स्ट्राइक की तो दुश्मन को खबर तक नहीं हुई। इसी तरह भारतीय वायुसेना के मिराज विमान एलओसी से करीब 80 किलोमीटर भीतर घुसकर आतंकियों के कैंप का सफाया कर दिया, लेकिन पाकिस्तान को भनक तक नहीं लग पाई कि भारत ऐसी कार्रवाई करने वाला है।

हमेशा निभाते हैं अहम भूमिका
- 1968 में अखिल भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए, केरल कैडर मिला।

- मिजोरम और पंजाब में उग्रवाद पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई।

- 1999 में कंधार विमान हाईजैक में सरकार के प्रमुख तीन वार्ताकारों में रहे।

- 15 हाईजैक की कोशिशों को निपटने में भूमिका निभाई, 1971 से 1999 के बीच।

- 1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर-2 से अहम खुफिया जानकारी जुटाई।

- 1990 में कश्मीर में उग्रवाद पर काबू के लिए जम्मू एवं कश्मीर भेजा गया।

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