नई दिल्ली, जेएनएन। भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य एवं कूटनीतिक स्तर पर चुप्पी का माहौल है। जहां पिछले तीन दिनों से पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा से कोई अप्रिय खबर नहीं आई है वहीं कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच किसी संपर्क की सूचना नहीं है। इस बीच नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वीडोंग (Chinese envoy Sun Weidong) ने सभी सैनिकों के पीछे हटने को जरूरी बताया है। हालांकि अपनी चालबाजी से बाज नहीं आते हुए वह भारतीय सेना को कटघरे में खड़ा करने से भी नहीं चूके...

सहयोग को बढ़ावा देने की कही बात 

चीनी राजदूत ने भारत और चीन के बीच टकराव की जगह सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही है। आपसी भरोसे को बढ़ाने और संदेह को खत्म करने की बात को दोहराया है। वैसे मई 2020 में पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अतिक्रमण करने के बाद सुन वीडोंग इस तरह का बयान कई बार दे चुके हैं। भारतीय पक्षकार मानते हैं कि यह चीन की कूटनीति का हिस्सा है कि एक ओर तो वह सीमा पर आक्रामक रवैया अपनाता है जबकि कूटनीतिक मोर्चे पर भरोसे को बढ़ाने की बातें करता है।

पांच सूत्रीय फार्मूले पर क्‍या कदम उठाए नहीं बताया 

पिछले हफ्ते मास्को में विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच जिन पांच मुद्दों पर सहमति बनी थी उन्हें जमीनी तौर पर लागू करने को लेकर भी अभी तक कोई स्पष्ट सूचना सामने नहीं आई है। स्वयं चीनी राजदूत के लंबे बयान में इस बात का जिक्र नहीं है कि चीन की तरफ से पांच सूत्रीय फार्मूले को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने इतना जरूर कहा कि दोनों देशों को जल्द से जल्द शांति स्थापित करने के लिए सैनिकों को पीछे करना चाहिए।

उल्‍टे भारतीय सेना पर लगाए आरोप 

उल्‍टे राजदूत सुन वीडोंग ने कुछ भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के हवाले से यह साबित करने की कोशिश की कि भारतीय सेना की तरफ से ही एलएसी का अतिक्रमण किया गया है। यही नहीं पिछले दिनों पैंगोग झील के दक्षिणी इलाके में हुई गोली चलने की पूरी जिम्मेदारी भी भारतीय सेना के जवानों पर डाल दी। वहीं सूत्रों का कहना है कि पिछले गुरुवार को जयशंकर एवं वांग यी की बातचीत से एक दिन पहले से एलएसी पर हालात सामान्य है यानी पहले से बिगड़ी नहीं है।

चीन पर यकीन करना होगी जल्दबाजी 

हालांकि इसे चीन के रवैये में बदलाव के तौर पर मान लेना जल्दबाजी होगी क्‍योंकि ऐसे संकेत नहीं मिल रहे हैं कि जिस तरह से मई के अंत या जून माह के शुरुआत में चीनी सैनिकों ने गलवन घाटी के कुछ इलाकों से सैनिकों को पीछे किया था वैसे इस बार भी कर रहे हैं। विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद घोषित पांच फार्मूले में मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के मुताबिक सुलझाया जाएगा। वार्ता में माना गया था कि पूर्वी लद्दाख का तनाव दोनों देशों के परस्पर हितों के अनुरूप नहीं है। 

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