नई दिल्ली, पीटीआइ। रूस से एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की खरीद पर अमेरिका द्वारा चिंता व्यक्त करने के बीच भारत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह स्वतंत्र विदेश नीति का अनुसरण करता है जो उसकी रक्षा खरीद एवं आपूर्ति पर भी लागू होती है और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों से निर्देशित होती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह बात कही।

पूछा गया था यह सवाल

अरिंदम बागची से अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस के उस बयान के बारे में पूछा गया था कि रूस से भारत द्वारा एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की खरीद को लेकर अमेरिका की चिंताओं में कोई बदलाव नहीं आया है। बागची ने कहा, 'अमेरिका और भारत के बीच समग्र वैश्विक सामरिक गठजोड़ है। वहीं, रूस के साथ भारत का विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक गठजोड़ है।'

अमेरिका का रूस पर निशाना

अमेरिका का कहना है कि रूस का भारत को एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली बेचना क्षेत्र में और संभवत: उससे परे भी अस्थिरता पैदा करने में मास्को की भूमिका को प्रदर्शित करता है। भारत ने अक्टूबर, 2018 में रूस के साथ एस-400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की पांच इकाइयों की खरीद के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। अमेरिका की तत्कालीन ट्रंप सरकार ने इस सौदे पर आगे बढ़ने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी।

काटसा पर अभी फैसला नहीं

प्राइस ने कहा कि जहां तक काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (काटसा) के तहत भारत पर प्रतिबंधों की बात है तो मैं पहले ही कह चुका हूं कि इस बारे में हमने अभी कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन इस सौदे के लिए काटसा के तहत प्रतिबंध के खतरे के मद्देनजर भारत सरकार से बातचीत जारी है।

क्‍या है काटसा कानून

काटसा अमेरिका का 2017 का कानून है जिसके तहत रूस से बड़ी रक्षा खरीद करने वाले देशों पर अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रूस से एस-400 प्रणालियां खरीदने पर 2020 में अमेरिका ने काटसा के तहत तुर्की पर प्रतिबंध लगा दिए थे। प्राइस ने कहा कि भारत हो या कोई अन्य देश, हम सभी देशों से अनुरोध करते रहेंगे कि वे रूस से बड़ी रक्षा खरीद करने से परहेज करें।

Edited By: Krishna Bihari Singh