नई दिल्ली। राहुल द्रविड़ के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उनकी जगह लेने के प्रमुख दावेदारों में शुमार रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा ने टीम इंडिया की इस दीवार की तारीफ करते हुए कहा कि वे उनके सकारात्मक रवैए, स्वभाव और विनम्रता को अपनाना चाहेंगे।

भारत के लिए 77 वनडे में 1889 रन बना चुके रोहित ने कहा, मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। सबसे बड़ी बात अपने विकेट की अहमियत समझना है। उन्होंने कहा, दूसरी बात उनसे यह सीखी है कि किसी भी हालत में जुझारूपन नहीं छोड़ना है। दबाव को महसूस करके अच्छा खेलना है, जो अच्छे बल्लेबाज की निशानी है। हमने उनसे यह सीखा है। प्रतिभाशाली बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने कहा, उन्होंने सिखाया कि आपका विकेट कितना अहम है और इसकी हमेशा कद्र करनी है। वह मैदान के भीतर और बाहर हमेशा विनम्र रहे, जो काबिले तारीफ है। मैंने दक्षिण क्षेत्र के खिलाफ 2008-09 में दलीप ट्राफी फाइनल में 165 और 98 रन बनाए थे। मैं अपनी बल्लेबाजी को लेकर चिंतित था और इतने बड़े खिलाड़ी से बात करने में डर रहा था। वह खुद मेरे पास आए और कहा कि मैं अच्छा खेल रहा हूं और ऐसे ही खेलते रहने की जरूरत है। उन्होंने मुझे अपनी बल्लेबाजी पर विश्वास रखने की सलाह दी। मैंने उनको देखकर क्रिकेट खेलना सीखा और उनका मुझ पर भरोसा जताना बहुत बड़ी बात थी।

आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2010 के बेंगलूर टेस्ट में भारत के लिए पदार्पण करने वाले चेतेश्वर पुजारा ने कहा कि वह द्रविड़ की तरह सकारात्मक रवैया अपनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, मैं 20 या 21 साल का था। वह राजकोट में सौराष्ट्र के खिलाफ कर्नाटक के लिए खेल रहे थे। वह मेरे आदर्श खिलाडि़यों में से हैं। मैं उनसे पूछना चाहता था कि यदि मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहता हूं, तो क्या करूं। कैसे अपने खेल में सुधार करूं। वह मुझसे बात करके बहुत खुश थे। काफी दोस्ताना रवैया था। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में उन्होंने बहुत सुना है और वह घरेलू सर्किट पर मेरे प्रदर्शन से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने मुझे कुछ टिप्स भी दिए।

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