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प्रेग्नेंसी प्लैन करने से पहले जरूर करवा लें ये जरूरी जांचें

5 photos    |  Published Thu, 22 Jul 2021 04:05 PM (IST)
1/ 5रूटीन टेस्ट
रूटीन टेस्ट

प्रेग्नेंसी प्लैन करने से पहले ही रूटीन ब्लड टेस्ट जरूर करवा लें। इस टेस्ट के तहत हीमोग्लोबिन और दूसरे टेस्ट आते हैं। ब्लड ग्रुप की जांच के जरिये आर एच फैक्टर की पहचान करवाना भी बेहद आवश्यक होता है। पत्नी के आर एच नेगेटिव होने पर पति के ब्लड ग्रुप की भी जांच की जाती है। उसके अलावा अपने वजन आदि की जांच भी करवा लें। अगर कमजोर हों तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी डाइट पर ध्यान देना शुरू कर दें।

2/ 5थायरॉयड प्रोफाइल
थायरॉयड प्रोफाइल

प्रेग्नेंसी से पहले स्त्री का थायरॉयड कंट्रोल में न होने से कंसीव करने में परेशानी हो सकती है। इसको नजरअंदाज करने पर जन्म के बाद बच्चे के शारीरिक व मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पडने की आशंका रहती है। मां व बच्चे के स्वास्थ्य को देखते हुए ऐसे केस में मां को अबॉर्शन करवाने की सलाह भी दी जाती है।

3/ 5रूबैला टेस्ट
रूबैला टेस्ट

बच्चे के सही विकास के लिए मां का रूबैला वैक्सीन लेना बहुत जरूरी होता है। डॉक्टर्स इस वैक्सीनेशन के छह महीने के बाद प्रेग्नेंसी प्लैन करने की इजाजत देते हैं। रूबैला वैक्सीन न लगने की स्थिति में बच्चे में मानसिक व शारीरिक अस्वस्थता हो सकती है।

4/ 5ब्लड शुगर टेस्ट
ब्लड शुगर टेस्ट

यह टेस्ट स्त्रियों का शुगर लेवल पता करने के लिए किया जाता है। गर्भधारण करने से पहले मां का ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है, वर्ना बच्चे को कई गंभीर बीमारियां होने की आशंका बनी रहती है। वह दिल, दिमाग, आंखों व स्पाइन की गंभीर बीमारियों से संक्रमित हो सकता है। साथ ही मां को भी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

5/ 5थैलसीमिया कैरियर टेस्ट
थैलसीमिया कैरियर टेस्ट

किसी स्त्री के थैलसीमिया कैरियर होने पर उनके पति के थैलसीमिया की भी जांच करवाई जाती है। अगर दोनों को थैलसीमिया माइनर होता है तो बच्चे के थैलसीमिया मेजर होने का खतरा रहता है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती तीन महीने में गर्भ में ही बायोप्सी के द्वारा बच्चे के थैलसीमिया की जांच करवाई जाती है। उसके माइनर होने पर चिंता की कोई बात नहीं होती है पर मेजर होने की स्थिति में जन्म के बाद बच्चा तब तक ही जिंदा रह पाता है, जब तक कि उसका ब्लड ट्रांसफ्यूजन चलता रहे। ऐसे मामले में गर्भपात करवाने की सलाह भी दी जाती है, क्योंकि जन्म के बाद बच्चा सामान्य जीवन नहीं जी पाता है।

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