छेड़छाड़ से बचने के लिए सीखा लड़ना, अब बढ़ाया देश का मान, जानिए कौन हैं एशियन गेम्स में मेडल पक्का करने वाली सुचिका तारियाल
सुचिका तारियाल ने आइची-नागोया-2026 एशियन गेम्स में भारत के लिए पहला मेडल पक्का किया है। छेड़छाड़ से निपटने के लिए ...और पढ़ें

सुचिका तारियाल ने मेडल किया पक्का (PC- SAI Media)

समय कम है?
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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। आइची-नागोया-2026 में खेले जा रहे एशियन गेम्स-2026 में भारत के लिए पहला मडेल पक्का करने वाली सुचिका तारियाल की कहानी किसी प्ररेणा से कम नहीं है। उनकी कहानी लड़ने की हिम्मत बयां करती है और गलत के खिलाफ आवाज उठाने के लिए अपने आप को तैयार करने की तस्वीर भी दिखाती है। बात वहां से शुरू होती है जो लड़कियों के जीवन में आम बात सी बन गई है यानी छेड़छाड़ से।
सुचिका ने इसी छेड़छाड़ से निपटने के लिए लड़ना सीखा और ऐसा सीखा कि जापान में पोडियम तक पहुंच गईं। 12 साल की उम्र में जब उनसे छेड़छाड़ हुई थी तो उनकी जुवान से एक ही बात निकली थी, "मुझे लड़ना सीखना है।"
बदल गई कहानी
24 साल बाद जब वह 36 साल की हुईं तो लड़ने के जज्बे ने उनके गले में मेडल की चमक पक्की कर दी। सुचिका ने रविवार को मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में मंगोलिया की एल्टानचिमेग बाइगालमा को 2-0 से मात देकर कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का कर दिया। सोमवार को वह सेमीफाइनल में उतरेंगी और कोशिश करेंगी कि गोल्ड मेडल जीत सकें। इस खेल में सेमीफाइनल में पहुंचने का मतलब होता है कि खिलाड़ी कम से कम ब्रॉन्ज मेडल जीतकर ही आएगा। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सुचिका ने जीत के बाद कहा, "अपने देश के लिए मेडल पक्का करना शानदार है। ये समय है जब मैं गोल्ड मेडल के लिए अपना दम लगाऊं।"
उन्होंने कहा कि बचपन से उनका सपना था कि वह लड़ना सीखें। बकौल सुचिका, "बचपन से मेरा एक सपना था कि मुझे किसी तरह की लड़ाई सीखनी है। इसलिए मैंने जूडो चुना। वो सफर मुझे यहां तक लेकर आया। ये अगले स्तर पर जाने के लिए सबसे सही बेस था और जूडो ने मुझे काफी मदद की है।"
सेल्फ डिफेंस के लिए की तैयारी
हरियाणा के रोहतक की रहने वाली सुचिका ने महज 12 साल की उम्र में छेड़छाड़ का सामना किया और तभी से मन बना लिया था कि वह सेल्फ डिफेंस के लिए जूडो सीखेंगी। सबसे पहले वह जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में और बाद में पालम के दादा देव मंदिर सेंटर में ट्रेनिंग करती थीं। इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण के भोपाल सेंटर में उन्होंने अपने खेल को निखारा। प्रतिस्पर्धी खेल में आना उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि उनका परिवार शुरुआत में ये नहीं चाहता था, लेकिन सुचिका ने एक शानदार करियर बनाया। उन्होंने 20 इंटरनेशनल इवेंट्स खेले हैं और आठ बार की नेशनल चैंपियन रही हैं।
जूडो से जियू-जित्सू तक
इसके बाद सुचिका ने जियू-जित्सू को पकड़ा और 2024 में इस खेल की वर्ल्ड चैंपियनशिप में 63 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड जीता। उनका एमएमए करियर काफी पहले शुरू हो चुका था। साल 2017 में ही उन्होंने डेब्यू कर लिया था, लेकिन जूडो और फिर जित्सू के कारण उन्हें सफल होने में समय लगा। 2024 में वह पेशेवर एमएमए में वापस आईं और आज उन्होंने एशियन गेम्स में मेडल पक्का कर कमाल कर दिया।
