पिता का अधूरा सपना, सुजीत कलकल ने स्वर्ण से बढ़ाया आगे; घर में मैट बिछाकर शुरू कराया था प्रशिक्षण
जिले के गांव इमलोटा के सुजीत कलकल के एशियन गेम्स स्वर्ण के पीछे पिता दयानंद के अधूरे ओलिंपिक सपने को बेटे के जरिये पूरा करने की वर्षों की मेहनत है।

सुजीत कलकल
HighLights
आठ साल तक खुद सिखाए कुश्ती के गुर
पिता दयानंद विश्व चैंपियनशिप में कर चुके हैं देश का प्रतिनिधित्व
ओलिंपिक पदक जीतने का सपना रहा अधूरा
संदीप श्योराण, जागरण, चरखी दादरी। जिले के गांव इमलोटा के सुजीत कलकल के एशियन गेम्स स्वर्ण के पीछे पिता दयानंद के अधूरे ओलिंपिक सपने को बेटे के जरिये पूरा करने की वर्षों की मेहनत है। दयानंद खुद अंतरराष्ट्रीय पहलवान रहे और विश्व चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन ओलिंपिक पदक जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका।
वर्ष 2013 में उन्होंने सुजीत को पहलवान बनाने का फैसला किया और घर में मैट बिछाकर प्रशिक्षण शुरू कराया। करीब आठ वर्ष तक खुद कुश्ती की बारीकियां सिखाने के बाद उन्होंने सुजीत को प्रतियोगिताओं में उतरा। अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण के बाद सुजीत का प्रदर्शन लगातार निखरता गया और वह 65 किग्रा में विश्व नंबर एक बने।
अब एशियाड स्वर्ण ने उनकी उपलब्धियों में नया अध्याय जोड़ दिया है। सुजीत ने शुरुआती प्रशिक्षण गांव के अखाड़े और घर पर पिता की निगरानी में लिया। 2021 में बेहतर अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण के लिए सोनीपत पहुंचे। इसके बाद सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी सफलता मिली। विश्व रैंकिंग और एशियाई स्तर की स्पर्धाओं में स्वर्ण जीतते हुए उन्होंने अपनी स्थिति मजबूत की।
ओलिंपिक चैंपियन को हराया, फिर पलटा फाइनल
एशियाड में चुनौती आसान नहीं थी। प्री-क्वार्टर फाइनल में अफगानिस्तान के सैयद उमर जजई को 13-3 और क्वार्टर फाइनल में ईरान के अब्बास इब्राहिमजादेह को 10-0 से हराया। सेमीफाइनल में जापान के मौजूदा ओलिंपिक चैंपियन कोटारो कियोका से मुकाबला 3-3 पर छूटा, लेकिन बड़े स्कोरिंग मूव के आधार पर सुजीत विजेता बने।
फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडीव ने उन्हें 2-9 से पीछे कर दिया। परिवार के सदस्य नर्वस हुए, लेकिन दयानंद को बेटे की वापसी का भरोसा था। सुजीत ने अंतिम चरण में लगातार अंक जुटाकर 10-9 से स्वर्ण जीत लिया।
दयानंद के अनुसार सुजीत पहले हाफ में बचाव और दूसरे हाफ में आक्रमण करते हैं। उनकी फुर्ती, डबल लेग, फीतले बांधना और भारंदाज जैसे दांव उनकी पहचान हैं। जीत की खबर मिलते ही इमलोटा में मिठाई बंटी और ग्रामीणों ने दयानंद को बधाई दी।
