बेटी को आगे बढ़ाने के लिए पिता ने बेची जमीन, तैयारी के लिए झेली वक्त की मार; फिर भी रोशिबिना ने रचा इतिहास
नाओरेम रोशिबिना देवी ने एशियाई खेलों में वुशु में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। यह उनका लगातार तीसरा पदक है। ...और पढ़ें

रोशिबिना देवी ने रचा इतिहास
HighLights
रोशिबिना देवी ने एशियाई खेलों में वुशु में रजत जीता
यह उनका लगातार तीसरा एशियाई खेल पदक है
पिता ने प्रशिक्षण के लिए अपनी जमीन का हिस्सा बेचा
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली : वुशु टीम में अंतिम समय में शामिल किया गया, तैयारी के लिए भी पर्याप्त वक्त नहीं था, लेकिन मणिपुर की नाओरेम रोशिबिना देवी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर अनुभव और जज्बा कितना मायने रखता है। 25 वर्षीय वुशू खिलाड़ी ने गुरुवार को एशियाई खेलों में लगातार तीसरा पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
हालांकि महिलाओं के 60 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में चीन की शियाओयू झांग से 0-2 से हार के कारण उन्होंने रजत पदक जीता। निशिन के एची प्रीफेक्चरल मार्शल आर्ट्स हाल में हुए फाइनल में पांचों जजों ने दोनों राउंड में चीनी खिलाड़ी के पक्ष में सर्वसम्मत 5-0 का फैसला दिया। दो-दो मिनट के दोनों राउंड में झांग ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और रोशिबिना को दबाव में रखा।
ऐसा रहा मैच
पहले राउंड में पांचों जजों के स्कोर झांग के पक्ष में 6-2, 6-3, 6-2, 6-2 और 8-2 रहे। दूसरे राउंड में चीनी खिलाड़ी ने और बेहतर प्रदर्शन किया। पांचों जजों ने उन्हें 10-2, 8-3, 7-3, 7-3 और 6-1 से बढ़त दी। झांग के तेज साइड-किक के सामने रोशिबिना अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर सकीं।
इसलिए खास है कहानी
रोशिबिना की इस उपलब्धि की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वह मूल रूप से भारतीय टीम का हिस्सा नहीं थीं। जून में श्रीनगर में हुए ट्रायल में वह दिव्यांशी चौधरी से हार गई थीं। इसके बाद दिव्यांशी को एसीएल चोट के कारण टीम से हटना पड़ा और करीब 10 सितंबर को रोशिबिना को टीम में शामिल किया गया। रोशिबिना ने बताया कि उन्हें एशियाड में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद सीधे मणिपुर से जापान आना पड़ा और तैयारी के लिए ज्यादा समय नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि उनके कोच अमित पाल ने इस मुश्किल समय में उनका काफी साथ दिया। फाइनल के बाद रोशिबिना ने कहा कि वह फिर रजत ही जीत सकीं और देश के लिए स्वर्ण नहीं ला पाने का उन्हें अफसोस है। उन्होंने कहा कि वह अपनी गलतियों से सीखकर आगामी प्रतियोगिताओं में भारत के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी।
प्रशिक्षण के लिए पिता ने बेची जमीन
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वासिफाई मायाई लीकाई की रहने वाली रोशिबिना के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। किसान पिता नाओरेम दामू सिंह शुरुआत में बेटी को वुशू खेलने देने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन बेटी का जुनून देखकर उन्होंने उसका समर्थन किया। सीमित आर्थिक साधनों के बावजूद उन्होंने रोशिबिना के प्रशिक्षण और यात्रा का खर्च उठाने के लिए अपनी जमीन का एक हिस्सा तक बेच दिया।
कोच ने भी तैयारी की कमी मानी
रोशिबिना के कोच अमित पाल ने भी माना कि खिलाड़ी को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जून के ट्रायल में हारने के बाद रोशिबिना करीब डेढ़ महीने तक राष्ट्रीय शिविर से बाहर थीं। दिव्यांशी की चोट के बाद 10 सितंबर को उन्हें टीम में शामिल किया गया और इसके बाद तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला।
चयन विवाद पर रोशिबिना ने दी सफाई
विवादों में घिरे अपने चयन को सही साबित करने वाली भारतीय वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने चोट के कारण बाहर की गईं खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी के अनुचित चयन के आरोपों पर बात करने से इन्कार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जो हुआ वह मेरी वजह से नहीं हुआ। फाइनल के बाद रोशिबिना ने कहा कि जो हुआ वह मेरी वजह से नहीं हुआ। यह महासंघ का फैसला था। भारतीय वुशु महासंघ ने जो भी फैसला लिया, मुझे लगता है कि वह सही था। मैं आरोप को नजरअंदाज करूंगी। मैं बस अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहती हूं।
