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Jaspal Rana के निधन से शोक में डूबा भारतीय खेल जगत, एशियन गेम्‍स में दिलाया था देश को गोल्‍ड

Published: Fri, 12 Jun 2026 10:01 AM (IST)Updated: Fri, 12 Jun 2026 10:29 AM (IST)

भारत के निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। वह 49 साल के थे। राणा के निधन ...और पढ़ें

जसपाल राणा

जसपाल राणा

HighLights

  1. भारत के निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का निधन

  2. जसपाल राणा के निधन से शोक में डूबा खेल जगत

  3. भारत के लिए एशियन गेम्‍स में राणा ने जीता था गोल्‍ड मेडल

स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, नई दिल्‍ली। भारत के मशहूर निशानेबाजी कोच और पूर्व एशियन गेम्‍स गोल्‍ड मेडलिस्‍ट जसपाल राणा का शुक्रवार को 49 की उम्र में निधान हो गया। राणा भारत के पिस्‍टल शूटर्स के हाई परफॉर्मेंस कोच की भूमिका निभा रहे थे। जानकारी मिली है कि म्‍यूनिख में आईएसएसएफ वर्ल्‍ड कप से भारत लौटते समय उन्‍हें कुछ असहज महसूस हुआ।

जानकारी के मुताबिक नई दिल्‍ली पहुंचते ही राणा को साकेत के मैक्‍स अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने जसपाल राणा के निधन की पुष्टि की।

राणा की मृत्‍यु भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। इस खेल में राणा ने तीन दशक से ज्‍यादा समय अपनी सेवाएं दी। उन्‍होंने खिलाड़ी और कोच दोनों की भूमिका बखूबी निभाई।

जसपाल राणा के भारत के सबसे मशहूर पिस्‍टल शूटर्स में से एक थे। 1990 के समय में वो चर्चाओं का केंद्र बने जब अंतरराष्‍ट्रीय प्रतियोगिताओं में दमदार प्रदर्शन किया। उन्‍होंने एशियन गेम्‍स, कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स और एशियन चैंपियनशिप्‍स में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल निशानेबाजों में से एक बने।

जसपाल राणा की सफलता की कहानी

राणा ने कई साल भारत का प्रतिनिधित्‍व किया और निशानेबाजी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। तब यह खेल भारत में विकसित हो रहा था। राणा की सफलता ने उन्‍हें दुनियाभर में पहचान दिलाई और युवाओं को शूटिंग खेल अपनाने के लिए प्रेरित किया।

राणा ने प्रतिस्‍पर्धी करियर के बाद कोचिंग में अपनी पारी खेली और जल्‍द ही भारतीय शूटिंग के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक बने। वह राष्‍ट्रीय कोचिंग से जुड़े और 2012 में जूनियर पिस्‍टल प्रोग्राम की जिम्‍मेदारी संभाली। अगले दशक तक राणा ने कई प्रतिभाशाली खिलाड़‍ियों को तैयार किया, जिन्‍होंने आगे चलकर अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

गुरु बनकर किया जादू

जसपाल राणा के मार्गदर्शन में सौरभ चौधरी, अनिश भानवाला और चिंकी यादव ने खूब सफलता प्राप्‍त की। जूनियर प्रोग्राम में राणा के योगदान को काफी पहचान मिली क्‍योंकि भारत ने साल दर साल बेहतरीन पिस्‍टल शूटर्स दिए।

राणा को अपनी शानदार योजना, तकनीकी विशेषज्ञता और ज्‍यादा दबाव वाली स्थितियों में निशानेबाजों को तैयार करने के लिए जाना जाता था। उनकी ट्रेनिंग के तरीकों में प्रतियोगिता जैसे हालात बनाने पर ज्‍यादा जोर दिया जाता था ताकि एथलीट बड़े इवेंट्स की जरुरत के हिसाब से खुद को ढाल सके।

मनु भाकर के मेंटर

जसपाल राणा के कोचिंग करियर में सबसे शानदार अध्‍याय मनु भाकर के साथ जुड़ना रहा। राणा ने भाकर की तैयारी और विकास में अहम भूमिका निभाई। यही वजह रही कि मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में दो मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्‍टल और 10 मीटर एयर पिस्‍टल मिक्‍स्‍ड टीम में ब्रॉन्‍ज मेडल जीते।

राणा को सम्‍मान

खेल में योगदान को देखते हुए एनआरएआई ने फरवरी 2025 में जसपाल राणा को 25 मीटर पिस्‍टल श्रेणी में हाई परफॉर्मेंस कोच बनाया। वह राष्‍ट्रीय निशानेबाजी प्रोग्राम में सक्रियता से शामिल थे और मृत्‍यु से पहले भारत के दिग्‍गज पिस्‍टल निशानेबाजों के साथ काम कर रहे थे।

कोचिंग और एथलीट विकास में योगदान देने के लिए जसपाल राणा को 2020 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया, जो कि भारतीय खेल जगत में सबसे बड़े सम्‍मानों में से एक है।

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