भारत को कबड्डी में गोल्ड दिलाने वाली बेटियों की कहानी, पुष्पा ने पिता से सीखी बारीकियां तो संजू ने मजदूरी छोड़ बनाया करियर
भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शनिवार को ईरान को मात देकर एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता। भारत की ...और पढ़ें

भारतीय महिला कबड्डी टीम
HighLights
फाइनल में रेडर्स ने निभाई निर्णायक भूमिका: पुष्पा
पुष्पा राणा की कप्तानी में जीता स्वर्ण पदक
पिता जयपाल राणा शिक्षक और पूर्व कबड्डी खिलाड़ी हैं
जागरण टीम, धर्मशाला। भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने शनिवार को कहा कि एशियाई खेलों के फाइनल में ईरान के विरुद्ध जीत में टीम के रेडर्स ने अहम भूमिका निभाई। भारत ने कड़े मुकाबले में ईरान को 37-34 से हराकर महिला कबड्डी में लगातार शानदार प्रदर्शन जारी रखा।
पुष्पा ने कहा कि टीम के रेडर्स उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। उनका मुख्य लक्ष्य यही था कि यदि डिफेंडर्स से अपेक्षित प्रदर्शन नहीं भी हो पाए तो रेडर्स लगातार अंक जुटाते रहें। उन्होंने माना कि टीम पर स्वर्ण पदक जीतने का दबाव था, क्योंकि भारतीय महिला टीम जब भी एशियाई खेलों में उतरी है, उसने स्वर्ण पदक जीता है।
देश को समर्पित यह जीत
कप्तान ने कहा कि पूरे देश और टीम को भरोसा था कि भारत खिताब बचाने में सफल रहेगा। खिलाड़ियों ने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी और कोच तथा महासंघ से भी पूरा समर्थन मिला। उन्होंने स्वर्ण पदक देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि यह सफलता पूरे देश के आशीर्वाद से मिली है।
पिता से सीखी कबड्डी की बारीकियां
पुष्पा राणा का जन्म 11 जनवरी 1998 को सिरमौर जिले के शिलाई इलाके के मिल्लाह गांव में हुआ था। उनके पिता जयपाल राणा शिक्षक और पूर्व कबड्डी खिलाड़ी हैं। पुष्पा ने पिता और भाई संजीव से कबड्डी की बारीकियां सीखी। उनके भाई रविंद्र राणा ने बताया कि पुष्पा की सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकी रितु
सिरमौर के शिलाई विधानसभा के शरोग गांव की रितु नेगी ने ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। रितु ने शिलाई स्कूल में आठवीं कक्षा से कबड्डी खेलना शुरू किया।
2006 में राज्यस्तरीय खेल ट्रायल में रितु नेगी का चयन स्पोर्ट्स हास्टल बिलासपुर के लिए हुआ। जहां आठ साल तक खेल छात्रावास में प्रशिक्षण लिया, उसी दौरान नेशनल लेवल तक कबड्डी खेली। महिला कबड्डी विश्व कप में 2025 में देश को स्वर्ण पदक दिलाया।
जूनियर एशिया चैंपियनशिप मलेशिया में भारतीय टीम का नेतृत्व किया। एशियन गेम-2023 में भारतीय टीम की कप्तान रहीं। रितु नेगी भारतीय रेलवे में आफिस सुपरिंटेंडेंट के पद पर हैदराबाद में तैनात हैं।
खेतों में ही नाचे भावना के पिता
फाइनल मुकाबले में भारत ने जैसे ही ईरान को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, मंडी जिला के पंडोह के साथ लगते बैला गांव के किसान प्रेम सिंह खुशी से अपने खेतों में ही नाचने लगे। जिस समय देश की बेटियां मैदान पर पसीना बहा रही थी, ठीक उसी समय भावना का पूरा परिवार सुबह से ही खेतों में लहसुन की बिजाई करने में जुटा हुआ था।
कड़े शारीरिक श्रम के बीच परिवार के सदस्यों ने काम नहीं रोका, बल्कि मोबाइल फोन के जरिए मुकाबले का सीधा प्रसारण खेतों में ही देखना शुरू कर दिया।
मजदूरी से कबड्डी के अखाड़े तक पहुंची संजू देवी
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार की संजू देवी की कहानी अभावों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने की मिसाल है।
कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों के लिए माता-पिता के साथ मजदूरी और खेती-किसानी से जुड़ी जिंदगी देखने वाली संजू ने कबड्डी को अपना करियर बनाया और आज उस भारतीय महिला कबड्डी टीम की प्रमुख रेडर के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, जिसने शनिवार को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
2025 महिला कबड्डी विश्व कप में भी भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाने के बाद उन्हें टूर्नामेंट की मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (एमवीपी) चुना गया था।
छत्तीसगढ़ के लिए संजू की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह प्रदेश से भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला कबड्डी खिलाड़ी हैं। एक साक्षात्कार में संजू ने बताया था कि टूर्नामेंट के लिए बांग्लादेश जाने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे समय में उनके कोच ने उन्हें पांच हजार रुपये उधार दिए।
