(पीटी उषा का कॉलम)

मैं ओडिशा में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के भव्य आगाज से काफी उत्साहित महसूस कर रही हूं क्योंकि ये सही दिशा में उठाया गया कदम है। खेलो इंडिया स्कूल गेम्स के पहले संस्करण और खेलो इंडिया यूथ गेम्स के दूसरे संस्करण के बाद जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तलाशने में काफी मदद मिली। अब जरूरत ये सुनिश्चित करने की है कि खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स से मिले मंच के जरिये युवा प्रतिभाओं को शीर्ष पर पहुंचने का मौका मिल सके।

एथलेटिक्स जैसे कड़े प्रतिस्पर्धी खेलों में जूनियर खिलाडि़यों के लिए सीनियर स्तर पर खुद को स्थापित करना आसान नहीं रहता। उन्हें कुछ समय और अवसरों की जरूरत होती है, जो खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के जरिये उन्हें मिलेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। स्टार धाविका दुती चंद इसका बेहतरीन उदाहरण हैं, जिससे पता चलता है कि यूनिवर्सिटी गेम्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की दिशा में कितने मददगार होते हैं। पिछले साल उन्होंने व‌र्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। इससे उन्हें विश्व स्तरीय मंच पर पदक जीतने की कोशिश और उसके लिए कड़ी ट्रेनिंग करने का विश्वास मिलेगा। दुती चंद खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में हिस्सा ले रहीं हैं और वे निश्चित रूप से इन खेलों का आकर्षण होंगी।

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की महिलाओं की 100 मीटर रेस में दुती चंद आकर्षण का केंद्र होंगी। हालांकि मैं ये देखने को लेकर भी काफी उत्साहित हूं कि कोट्टायम की एमजी यूनिवर्सिटी में इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता एनएस सिमी का प्रदर्शन कैसा रहता है। सिमी ने 11.56 सेकेंड का समय निकाला था। सिमी जैसे एथलीटों के उभरने से भारत की चार गुणा 100 मीटर महिला रिले टीम को काफी फायदा होगा। एक और अन्य प्रतिभाशाली एथलीट आरती पाटिल पर मेरी नजर है, जिन्होंने पुणे में इंटर यूनिवर्सिटी गेम्स में लांग डिस्टेंस इवेंट में जीत हासिल की। पाटिल भी इस क्षेत्र से आने वालीं लांग डिस्टेंस स्टार कविता राउत और ललिता बब्बर के नक्शेकदम पर चलकर नाम कमा सकती हैं।