ओलंपिक मेडल जीतने वाला वो रिकॉर्डधारी जिसने पकड़ी फिल्मों की राह, फिर राजनीति में भी आजमाया हाथ; जानिए कौन है ये खिलाड़ी
भारत को मुक्केबाजी में पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाला यह मुक्केबाज फिल्मों में काम कर चुका है और राजनीति के मैदान में भी उतर चुका है।

विजेंदर सिंह ने ओलंपिक में किया कमाल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। भारत खेलों में काफी आगे निकल कर रहा है। हर बड़े टूर्नामेंट में भारत को मेडल मिल रहे हैं चाहे फिर वो एशियन गेम्स हों या ओलंपिक। ओलंपिक खेलों में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़ी है। हालांकि, एक समय ऐसा था जब बहुत कम खिलाड़ी ये कमाल कर पाते थे। ऐसे समय में विजेंदर सिंह ने मुक्केबाजी में भारत को पहला मेडल दिलाया था और इतिहास रचा था।
उनकी गिनती भारत के दिग्गज मुक्केबाजों में होती है। वह ओलंपिक मेडल जीतने वाले भारत के पहले मुक्केबाज थे। लेकिन विजेंदर को सिर्फ मुक्केबाज कहना ठीक नहीं है उनको एक्टर और राजनेता भी कहा जाना चाहिए। हमारी खास सीरीज स्पोर्ट्स टू स्क्रीन में आज कहानी बीजिंग ओलंपिक-2008 के ब्रॉन्ज मेडल विजेता विजेंदर की।
मुक्केबाजी में बनाया करियर
विजेंदर भारत के उस शहर से आते हैं जिसे मिनी क्यूबा कहा जाता है। मुक्केबाजी की दुनिया में क्यूबा का बड़ा नाम है और यहां से भारी तादाद में मुक्केबाज निकलते हैं। इसी तरह भारत में हरियाणा राज्य के शहर भिवानी से कई दिग्गज मुक्केबाज निकले हैं और विजेंदर उनमें से ही एक हैं। विजेंदर ने ओलंपिक मेडल के अलावा 2009 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज जीता था। वह तीन बार कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने में सफल रहे जिसमें से दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज है। 2010 एशियन गेम्स में उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया था और इससे चार साल पहले दोहा एशियन गेम्स में वह ब्रॉन्ज जीतने में सफल रहे थे।
वह भारत के दिग्गज मुक्केबाजों में गिने जाते हैं। एक समय ऐसा आया कि वह एमेच्योर मुक्केबाजी छोड़ पेशेवर मुक्केबाजी में कूद गए और ऐसा करने वाले भारत के पहले मुक्केबाज बने। यहां भी विजेंदर ने अपना कमाल दिखाया।
फिल्मों का किया रुख
मुक्केबाजी में नाम कमाने के बाद विजेंदर को फिल्मों में एक्टिंग करने का मौका मिला। उन्होंने साल 2014 में अपना बॉलीवुड डेव्यू किया। कबीर सदानंद के डायरेक्शन में बनी फिल्म फगली में विजेंदर को रोल मिला और उन्होंने इसे कबूल किया। एक्टिंग करते हुए उन्होंने काफी मेहनत की और इस फिल्म के बाद उन्होंने कहा था कि बतौर एक्टर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। फिल्म ने पर्दे पर तो ज्यादा कमाल नहीं किया, लेकिन इसने विजेंदर को नया करियर ऑप्शन जरूर दिया।
इसके बाद विजेंदर 2023 में एक और फिल्म में नजर आए। यह फिल्म सलमान खान की थी और इसका नाम था 'किसी का भाई किसी की जान'। हालांकि, यहां तक आते-आते विजेंदर बतौर मुक्केबाज ज्यादा सक्रिय नहीं थे।
राजनीति में भी आजमाया हाथ
मुक्केबाजी रिंग से लेकर 17 एमएम के पर्दे तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बाद विजेंदर राजनीति में भी पीछे नहीं रहे थे। साल 2019 में वह राजनीति के मैदान में भी कूदे और कांग्रेस के टिकट पर साउथ दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़े। यहां वह मुक्केबाजी वाली सफलता नहीं दोहरा सके और चुनाव हार गए। कांग्रेस के सदस्य रहते हुए विजेंदर भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ लगातार बोलते रहे, लेकिन अप्रैल 2024 में फिजा बदली और इस मुक्केबाज ने अचानक से भाजपा की पताका पहन ली।
