निषाद को हर्डल रिंग्स नहीं मिले तो देसी जुगाड़ से लड़ी स्वर्ण पदक की लड़ाई
जापान के आइची-नागोया में पैरा एशियाई खेलों में निषाद कुमार ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि उन्हें अभ्यास के लिए हर्डल ...और पढ़ें
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निषाद को अभ्यास में हुई थी परेशानी

समय कम है?
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सुरेश बसन, जागरण, ऊना : जापान के आइची-नागोया में पैरा एशियाई खेलों में निषाद का स्वर्ण पदक का सफर आसान नहीं था। देश को स्वर्ण पदक दिलाने की निषाद की जिद ऐसी थी कि वह इस जीत के लिए पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। लेकिन निषाद को अभ्यास के लिए हर्डल रिंग्स नहीं मिले। रविवार को अभ्यास के दौरान जारी वीडियो में उन्होंने इस समस्या को बताया था।
इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए निषाद मैदान पर अभ्यास के लिए गहरी सांस लेते हैं और कहते हैं नो हर्डल रिंग्स नो प्राब्लम, लेट्स गो विदआउट हर्डल, आज हमारा हर्डल रिंग्स वर्कआउट है, लेकिन यहां पर नहीं है इनके पास, प्रोवाइड नहीं करवा रहे हैं।
करते हैं देसी जुगाड़
निषाद कहते हैं, विदआउट हर्डल रिंग्स ही अपना वर्कआउट कर लेंगे। इसमें तीन प्रकार के हर्डल जंप्स हैं, लेट्स डू इट, इतना कहते हुए निषाद अपने हर्डल को देसी जुगाड़ से कुछ मीटर तक पांव से मापते हुए अभ्यास हर्डल तैयार करते हैं और अपने अभ्यास में ऊंची कूद करते हैं। नागोया जापान में एथलेटिक ट्रैक पर उनका देसी अभ्यास अंदाज काफी चर्चित भी रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि रुकना विकल्प नहीं, समाधान ढूंढना हमारी जरूरत है।
निषाद ने ऐसे बनाया हर्डल
निषाद ने मैदान पर पानी की बोतल, स्ट्रेचेबल पट्टियां, गेंद, डंबल आदि को उचित दूरी पर रखते हुए हर्डल वर्कआउट मापदंड तैयार किया। इसी पर निषाद ने अपने तीन प्रकार के हर्डल जंप्स किए। एथलेटिक्स में हर्डल रिंग्स एथलीटों की गति, चपलता और पैरों के तालमेल को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक के समतल छल्ले (फ्लैट रिंग्स) होते हैं।
