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मुक्केबाजी छोड़ना चाहती थी, लेकिन अब स्वर्ण जीतकर खुश हूं: लवलीना बोरगोहेन

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:30 PM (IST)

लवलीना बोरगोहेन ने 2024 ओलिंपिक के बाद मुक्केबाजी से संन्यास लेने की योजना बनाई थी।

लवलीना बोरगोहेन

लवलीना बोरगोहेन

HighLights

  1. लवलीना बोरगोहेन ने अपने जन्मतिथि पर जीत गोल्‍ड मेडल

  2. 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की जियी बाओ को हराया

पीटीआई, निशियो। लवलीना बोरगोहेन ने 2024 ओलिंपिक के बाद मुक्केबाजी से संन्यास लेने की योजना बनाई थी, लेकिन पेरिस खेलों में पदक से चूकने के कारण उन्होंने अपना इरादा बदल दिया जो उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि भारतीय स्टार ने शुक्रवार को एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता।
ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता ने अपने जन्मतिथि पर 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीन की जियी बाओ को 5-0 से हराकर एशियाई खेलों की महिला मुक्केबाजी में भारत के 12 साल से चले आ रहा स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म किया। उन्होंने पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीता था।

लवलीना ने अपने मुकाबले के बाद कहा कि मेरे लिए यह वर्ष काफी मुश्किल रहा। पहले मैं मुक्केबाजी छोड़ना चाहती थी। लेकिन मैंने जारी रखा। मैं एशियाई खेलों में अपने पदक का रंग बदलना चाहती थी। यह बहुत महत्वपूर्ण था। उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मैंने खेलना जारी रखा।
असम की रहने वाली इस मुक्केबाज ने टोक्यो ओलिंपिक में कांस्य पदक जीता था लेकिन पेरिस ओलिंपिक से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने एक साल के लिए ब्रेक लिया और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी की। वह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई थी।

राष्ट्रमंडल खेलों में रजत से खुश नहीं थी

लवलीना ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने से मैं खुश नहीं थी। लेकिन एक खिलाड़ी के जीवन में बहुत सी चीजें होती हैं, जैसे हार, चोट। आपको बहुत सी चीजों का सामना करना पड़ता है। यह स्वर्ण पदक मेरे लिए बहुत महत्व रखता है। लवलीना ने कहा कि मैं अच्छा महसूस कर रही हूं। मुझे नहीं पता कि स्वर्ण पदक का जश्न कैसे मनाऊं। मुझे अपनी इस जीत को स्वीकार करने के लिए कुछ समय चाहिए। मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं।

जापान मेरे लिए भाग्यशाली है

इस 29 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि मुझे मजबूत रहना होगा और जीतना होगा। मैं हर चीज को लेकर बहुत सकारात्मक थी। जापान मेरे लिए बहुत भाग्यशाली है। मैं हमेशा जीतने के बारे में सोचती हूं। लवलीना से जब पूछा गया कि स्वर्ण पदक जीतने के बाद वह सबसे पहले किसे फोन करेंगी। उन्होंने कहा कि मैं सबसे पहले अपनी मां को फोन करूंगी। वह मेरे मैच नहीं देखतीं क्योंकि वह बहुत चिंतित रहती हैं।

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