Exclusive: 'आत्मविश्वास' के बल पर कमलजीत और सुरुचि के सपनों को मिली उड़ान, एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास
निशानेबाज कमलजीत और सुरुचि सिंह ने एशियाई खेलों की 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। दोनों ने गोल्ड जीतने के बाद अपने अनुभव साझा किए।

कमलजीत और सुरुचि सिंह
HighLights
कमलजीत और सुरुचि सिंह ने भारत को दिलाया गोल्ड
दोनों ने अपनी तैयारी, आत्मविश्वास और सफर के बारे में बताया
सुरुचि सिंह ने कुश्ती छोड़कर अपनाई निशानेबाजी
शेखर झा, जागरण, नई दिल्ली। जापान के आईची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है। शुक्रवार को 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद दोनों निशानेबाजों ने दैनिक जागरण से खास बातचीत की और अपनी तैयारी, आत्मविश्वास और सफर के बारे में बताया। कमलजीत से जब एशियाई खेलों की तैयारियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही पदक जीतने का पूरा भरोसा था।
उन्होंने बताया कि एशियाई खेलों से पहले लगाए गए दोनों प्रशिक्षण शिविर काफी अच्छे रहे और अभ्यास भी उम्मीद के मुताबिक चल रहा था।
कमलजीत ने क्या कहा
कमलजीत ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि हम पदक जीत सकते हैं। मेरी प्रैक्टिस बहुत अच्छी चल रही थी। एशियाई खेलों के दो कैंप लगे थे और दोनों ही अच्छे रहे। मुझे पूरा भरोसा था कि मैं पदक जरूर जीतूंगा।
उन्होंने व्यक्तिगत मुकाबले में उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया। कमलजीत ने कहा कि व्यक्तिगत स्पर्धा में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन मिक्स्ड टीम स्पर्धा में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। उनकी तैयारी में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जिस तरह तैयारी की थी, उसी तरीके को यहां भी जारी रखा।
आत्मविश्वास के साथ लिया हिस्सा
वहीं, सुरुचि से पूछा गया कि आखिर किस पल उन्हें लगा कि वह एशियाई खेलों में पदक जीत सकती हैं। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही अपनी तैयारी और प्रदर्शन पर भरोसा था। सुरुचि ने कहा कि अभ्यास के दौरान उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि वह पदक नहीं जीत सकतीं।
उनका पूरा ध्यान अपने प्रदर्शन पर था और इसी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने मुकाबले में हिस्सा लिया। सुरुचि ने अपने खेल सफर के बारे में बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत कुश्ती से की थी। उनके पिता बचपन से ही उन्हें खिलाड़ी बनाना चाहते थे। परिवार में वीरेंद्र पहलवान से प्रेरित होकर उन्होंने भी कुश्ती शुरू की, लेकिन कुछ महीने बाद कॉलरबोन में चोट लग गई।
सुरुचि के पिता नहीं चाहते थे कि खेल के शुरुआती दौर में उन्हें लंबे समय तक चोट से जूझना पड़े। इसलिए उन्होंने बेटी को शूटिंग की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उसे शूटिंग रेंज लेकर गए। सुरुचि को यह खेल पसंद आया और यहीं से उनके शूटिंग करियर की शुरुआत हुई।
