मूल टीम का हिस्सा नहीं थे, अब एशियाई खेल में बने स्वर्ण ‘कमल’, कमलजीत का आखिरी समय में मिक्स्ड टीम स्पर्धा में हुआ चयन
एशियाई खेलो में 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले कमलजीत टीम का हिस्सा भी नहीं थे।

कमलजीत और सुरुचि
मुकेश शर्मा, जागरण रेवाड़ी। जापान के नागोया में चल रहे एशियाई खेलो में 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी मिक्स्ड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले कमलजीत टीम का हिस्सा भी नहीं थे। आखिरी समय में उन्हें केदारलिंग बालकृष्ण उचागनवे के स्थान पर टीम में शामिल किया गया था।
कमलजीत ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया और झज्जर जिले के सासरोली की रहने वाली सुरुचि सिंह के साथ मिलकर संयुक्त रूप से देश को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया। रेवाड़ी के सुलखा गांव निवासी कमलजीत इसी वर्ष 28 अगस्त को भारतीय सेना में हवलदार के पद पर भर्ती हुए थे।
मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले कमलजीत शुरुआत में एथलीट बनना चाहते थे। उन्होंने धावक बनने का सपना देखा था, लेकिन साल 2021 में एक सड़क हादसे में उनका पैर टूटा तो यह सपना टूट गया। हादसे के बाद कमलजीत ने शूटिंग को नए करियर के रूप में चुना और अब एशियन गेम्स में आखिरी समय पर टीम स्पर्धा में शामिल होकर देश का नाम रोशन कर दिया।
आर्थिक तंगी से निशानेबाजी छोड़ने का बना लिया था मन
कमलजीत के चाचा दिनेश ने बताया कि मैच फीस, यात्रा और महंगी गोलियों का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं था। शुरुआती दौर में आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया था कि कमलजीत ने निशानेबाजी छोड़ने का मन बना लिया था। हालांकि, पिता रतीराम, मां राजबाला और उन्होंने उसका भरपूर साथ दिया। कमलजीत ने गांव के ही कोच शक्तिपाल की देखरेख में शूटिंग शुरू की और आज इस मुकाम पर पहुंचे।
