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मां के एक शब्द ने शूटर सुरुचि को दिया हौंसला, एशियन गेम्स में गोल्ड जीत झज्जर की बेटी की ने रचा इतिहास

By Amit Popli Edited By: Hema Devi
Published: Sat, 26 Sep 2026 10:36 AM (IST)

झज्जर की शूटर सुरुचि ने एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। ...और पढ़ें

झज्जर की बेटी की भावुक दास्तान।

झज्जर की बेटी की भावुक दास्तान।

HighLights

  1. सुरुचि ने एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीता

  2. मां के प्रेरणादायक शब्दों और भाई के विश्वास ने सुरुचि को जिताया

  3. निराशा के क्षणों में परिवार का अटूट समर्थन बना जीत का आधार

जागरण संवाददाता, झज्जर। निराशा की गहरी धुंध को चीरकर जब इरादे बुलंद होते हैं, तो निशाना सीधे इतिहास पर लगता है। एशियन गेम्स 2026 में 10 मीटर एयर पिस्टल के मिक्स्ड टीम इवेंट में देश को स्वर्ण पदक दिलाकर शूटर बेटी सुरुचि ने यही साबित कर दिखाया है।

झज्जर के सासरौली गांव की रहने वाली सुरुचि (पुत्री इंद्र सिंह) ने रेवाड़ी के निशानेबाज कमलजीत के साथ मिलकर जब पोडियम पर तिरंगा फहराया, तो पूरा देश झूम उठा।

लेकिन इस चमचमाते गोल्ड मेडल के पीछे छिप-छिपकर बहे वो आंसू, परिवार का अटूट विश्वास और मां की वो ममतामयी हुंकार थी, जिसने निराशा में डूबी बेटी को विजेता बना दिया।

जब टूटने लगा हौसला, तो परिवार बना ढाल

प्रतियोगिता के पहले मुकाबले में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न हो पाने और अस्वस्थ होने के कारण सुरुचि का मन बेहद उदास था। लेकिन जब हौसले डगमगाने लगे, तो परिवार ढाल बनकर खड़ा हो गया।

छोटे भाई निशांत ने बहन की ढाल बनते हुए कहा, दीदी, आप हमारी ताकत हैं। आपका खेल और तैयारी दोनों शानदार हैं। एक दिन का खराब प्रदर्शन आने वाले मुकाबलों का भविष्य तय नहीं कर सकता। हार-जीत तो खेल का हिस्सा है, बस आप मैदान में जमी रहिए। वहीं, मां सुदेश देवी ने अपनी बेटी के मन में उपजे डर को पल भर में दूर कर दिया।

मां ने दुलार और शक्ति भरते हुए कहा, बेटी, आपके अंदर कान्फिडेंस है तो पूरा लगाना, और इस बार निशाना सीधे गोल्ड पर ही लगाना!

जीतते ही घर किया फोन

'मां, जैसा आप चाहती थीं, वैसा ही हुआ' मां और भाई की यह सीख सुरुचि के लिए महामंत्र बन गई। शुक्रवार को जब सुरुचि रेंज में उतरीं, तो उनके दिमाग में दबाव नहीं, बल्कि परिवार का वो अटूट भरोसा था।

सटीक निशानों के साथ जैसे ही भारत ने गोल्ड पर कब्जा जमाया, सुरुचि नेघर फोन किया और भावुक होकर बोलीं, 'मां, जैसा आप चाहती थीं, बिल्कुल वैसा ही हुआ... आखिरकार आपकी बेटी ने गोल्ड जीत लिया।' सुरुचि की यह बात सुनते ही परिवार की आंखें खुशी से भर आईं। सुरुचि की 28 सितंबर तक वतन वापसी की उम्मीद है, जिसकी तैयारियों में परिवार अभी से जुट गया है।

घर में बनाई है शूटिंग रेंज, अब लक्ष्य ओलिंपिक गोल्ड 

बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मां सुदेश देवी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि सुरुचि ने अपना सपना पूरा कर दिखाया है और अब उनका सपना है कि बेटी भविष्य में देश के लिए ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीते। घर में शूटिंग को लेकर इस कदर जुनून है कि सुरुचि के भाई विशाल भी शूटिंग की बारीकियां सीख रहे हैं। भाई-बहन ने घर पर ही मशीन लगाकर एक शूटिंग रेंज तैयार की है।

मुख्यमंत्री ने दी बधाई, पर्सनल कोच बोले- जीत की असली हकदार मां 

सुरुचि और कमलजीत की इस उपलब्धि पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दोनों खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्वर्णिम सफलता पर पूरे राज्य और देश को गर्व है।

दूसरी ओर, सुरुचि के व्यक्तिगत कोच सुरेश कुमार ने बताया नेशनल कैंप में जाने के बाद भारतीय टीम के नियमों के तहत खिलाड़ियों के मोबाइल जमा कर लिए जाते हैं, जिससे पिछले दो महीनों से उनकी सुरुचि से बात नहीं हो पाई थी।

खिलाड़ी केवल परिवार से ही कुछ मिनट तक बात कर पाते हैं। कोच सुरेश ने जीत का पूरा श्रेय सुरुचि की मां सुदेश देवी को देते हुए कहा कि एक मां के शब्दों ने ही सुरुचि के भीतर वो ऊर्जा भरी, जिससे आज उसने विश्व पटल पर भारत का मस्तक ऊंचा किया है।

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