थाली-कटोरी और चम्मचों से बन सकते हैं हथियार, हरियाणा की जेलों में स्टील के बर्तनों पर लगा बैन
हरियाणा की जेलों में अब बंदियों को स्टील के बर्तनों की जगह मजबूत प्लास्टिक (पॉलीकार्बोनेट) के बर्तन दिए जाएंगे। यह ...और पढ़ें

बाएं- फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है
HighLights
हरियाणा जेलों में स्टील के बर्तनों पर प्रतिबंध लगाया गया।
बंदियों को अब मजबूत पॉलीकार्बोनेट के बर्तन मिलेंगे।
यह कदम जेल सुरक्षा बढ़ाने, हथियार बनने से रोकने हेतु।
मुकेश शर्मा, झज्जर। हरियाणा की जेलों में भोजन के बर्तन अब सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनेंगे। बंदियों को खाना खाने के लिए दिए जाने वाले स्टील के चम्मच, थाली और कटोरी चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे। इनके स्थान पर मजबूत प्लास्टिक यानी पॉलीकाबोंनेट के बर्तन दिए जाएंगे।
वजह यह है कि स्टील के बर्तनों को तोड़कर या उनके किनारों को फर्श और दीवारों पर घिसकर नुकीला बनाया जा सकता है। ऐसे सामान का आपसी विवाद में हथियार के रूप में इस्तेमाल होने की आशंका रहती है।
प्रदेश की 20 जेलों में करीब 27,500 बंदी हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता करीब 22 हजार है। करीब 1,100 महिला बंदियों और 900 से 1,000 चक्की बंदियों को पहले चरण में नए बर्तन दिए जा चुके हैं।
सामान्य बैरकों के लिए भी मांग भेजी गई है। पूरी व्यवस्था पर 50 से 60 लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान है।
थाली से हथियार बनने की आशंका
जेलों में स्टील के बर्तन बंदियों को भोजन के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। तलाशी के दौरान इनके टूटे या बदले हुए हिस्सों के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। स्टील के किनारे को कठोर सतह पर लगातार घिसने से उसे नुकीला बनाया जा सकता है।
पिछले तीन वर्षों में प्रदेश की जेलों में 150 से अधिक हस्तनिर्मित नुकीली वस्तुओं की बरामदगी का आंकड़ा सामने आया है। इन में स्टील के बर्तनों से तैयार किए गए हथियार भी शामिल बताए गए हैं।
20 जेलों में चरणबद्ध बदलाव
प्रदेश में तीन केंद्रीय व 17 जिला जेल है। महिला बंदियों और चक्कियों से शुरुआत के बाद अब सामान्य बैरकों में भी स्टील के बर्तन हटाए जाएंगे।
एक बंदी की थाली, कटोरी और गिलास वाली किट की अनुमानित कीमत 180 से 220 रुपये है। करीब 27,500 बंदियों के लिए कुल खर्च 50 से 60 लाख रुपये तक रहने का अनुमान है। पालीकार्बोनेट बर्तन मजबूत और खाद्य उपयोग के अनुकुल श्रेणी के होंगे।
जेर्ला में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक के बर्तनों की व्यवस्था की जा रही है। चक्कियों में बंद कैदियों और महिलाओं को ये बर्तन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सामान्य बंदियों के लिए भी मांग भेजी गई है। उद्देश्य ऐसी वस्तुओं की उपलब्धता कम करना है, जिनका इस्तेमाल धारदार हथियार के रूप में किया जा सके। -सेवा सिंह, जेन अधीक्षक, जिला कारागार, दुत्नीना (झज्जर)
हर साल 40 से 60 झगड़े
जेलों में हर वर्ष करीब 40 से 60 आपसी झगड़े या गुटीय विवाद दर्ज होने का आंकड़ा है। इनमें करीब 25 से 30 प्रतिशत मामलों में बर्तनों या बैरक की छड़ों से बने नुकीले हथियारों के इस्तेमाल की बात सामने आती है। ऐसे में बर्तन बदलना जेलों के भीतर उपलब्ध संभावित हथियार साम्ग्री को कम करने की कवायद है।
