नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2018 में एक बार फिर से भारत को रेसलिंग में पदक की उम्मीद है और देश के रेसलर्स इन दिनों इसके लिए काफी कड़ी तैयारी कर रहे हैं। उनकी तैयारियों को एक बड़ा झटका ये लगा है कि वो बिना किसी विदेशी कोच के ही तैयारी कर रहे हैं। भारतीय पहलवान तीनों भारवर्ग यानी मेन्स फ्री-स्टाइल, ग्रीकोरोमन और महिला फ्री-स्टाइल, ग्रीकोरोमन की तैयारी बिना किसी विदेशी कोच के ही कर रहे हैं जिसकी वजह से उन्हें ज्यादा जानकारी हासिल नहीं हो पा रही है। 

भारतीय पहलवानों को ये दिक्कत इसलिए आ रही है क्योंकि साई की तरफ से अब तक कोई विदेशी कोच उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। साई की तरफ से कोच की खोज की जा रही है जिसे 2020 टोक्यो ओलंपिक तक रखा जा सके। इसमें रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की कमी सामने आई है जिनकी तरफ से साई को सिर्फ तीन नाम भेजे गए थे। इरान के हौसेन करीमी (मेन्स), रुस के फारनिव इरबेक (महिला) और जॉर्जिया के तेमो काजाराशविलि (ग्रीकोरोमन) के नाम इसमें शामिल हैं। लेकिन इन नामों को भेजने में हुई देरी की वजह से एशियाड के लिए किसी कोच को नहीं चुना गया। 

बाद में रूस के कोच ने अपना नाम वापस ले लिया था और रेसलिंग फेडरेशन ने इनकी जगह यूएसए के एंड्रयू कुक का नाम महिला कोच के लिए सुझाया। अब एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले रेसलर तीन भारतीय कोच जगमिंदर सिंह (मेन्स फ्रीस्टाइल), कुपदीप मलिक (महिला) और कुलदीप सिंह (ग्रीको-रोमन) की देखरेख में ट्रेनिंग कर रहे हैं। लेकिन इस बात की जरूरत महसूस की जा रही है कि रेसलर्स को ज्यादा फायदा विदेशी कोच की देखरेख में ही होता। 

दो ओलंपिक मेडल जीत चुके सुशील कुमार प्राइवेट तौर पर भारत के पूर्व फ्री स्टाइल कोच जॉर्जिया के ब्लादिमीर से कोचिंग ले रहे हैं। वहीं साक्षी मलिक और विनेश फोगट को भी विदेशी कोच उपलब्ध हैं जो कि उनके प्रायोजकों ने उन्हें उपलब्ध करवाया है। बजरंग पूनिया को योगेश्वर दत्त की देखरेख में ट्रेनिंग मिल रही है। 

ग्रीको-रोमन कुश्ती खेलने वाले एक रेसलर ने कहा कि हम काफी वक्त से बिना विदेशी कोच के ही ट्रेनिंग कर रहे हैं जिससे हमारी प्रैक्टिस पर काफी असर पड़ा है। विदेशी कोच के द्वारा हमें स्किल और टेकनिक के बारे में और भी ज्यादा जानकारी दी जाती है। मुझे उम्मीद है कि अक्टूबर में होने वाले वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप से पहले हमें विदेशी कोच उपलब्ध हो जाएंगे। 

Posted By: Sanjay Savern