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21वीं सदी में बढ़ी भारतीय खेलों की रफ्तार, एशियन गेम्स मेडल टैली में दिखा साफ असर; महिलाओं ने देश को दिलाई नई पहचान

Published: Mon, 05 Oct 2026 10:56 AM (IST)

21वीं सदी में भारतीय खेलों ने मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट्स में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें एशियाई खेलों में लगातार बेहतर ...और पढ़ें

भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम

भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम 

HighLights

  1. 21वीं सदी में भारतीय खेलों ने मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट्स में शानदार प्रगति की

  2. एशियाई खेलों में भारत की मेडल टैली में लगातार सुधार देखा गया

  3. महिलाओं ने भारतीय खेलों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है

स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। एक समय था जब खेलों में भारत की स्थिति अच्छी नहीं थी। मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट में भारत को जो सफलता मिलती थी वो चिंता का विषय ज्यादा होती थी और खुशी कम, लेकिन समय बदला है। खासकर 21वीं सदी में भारत ने खेलों में लगातार अच्छा किया है और आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। हाल ही में खत्म हुए एशियन गेम्स-2026 में भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा। पिछले संस्करण में भी भारत चौथे स्थान पर रहा था जो मेडल टैली में उसका अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

साल 1951 में भारत एशियन गेम्स में दूसरे स्थान पर रहा था। यह उसका इन खेलों में अब तक का बेस्ट प्रदर्शन है। हालांकि, मेडल टैली में निरंतरता हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रही है, लेकिन 2000 के बाद से देखा जाए तो भारत यहां बेहद निरंतर रहा है और टॉप-10 में बना रहा है।

बदल गई तस्वीर

आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि 21वीं सदी में भारतीय खिलाड़ियों ने वैश्विक मंच पर अपनी सफलता से नए आयाम लिखे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत का एशियाई खेलों का पूरा इतिहास देखा जाए तो उसमें देश ने कुल ऐतिहासिक मेडलों में से 53 प्रतिशत तो 2000 के बाद जीते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स भी इससे अछूते नहीं रहे। इन खेलों में भारत के कुल मेडलों में से 73 प्रतिशत 2000 के बाद आए हैं। ओलंपिक की कहानी तो सभी जानते हैं। पहले जहां भारत के लिए मेडल जीतना मुश्किल होता था, वहीं 2004 से भारत लगातार मेडल जीत रहा है। भारत के कुल ओलंपिक मेडल के 63 प्रतिशत 2000 के बाद से आए हैं। रिपोर्ट के ये आंकड़े बताते हैं कि भारत ने 21वीं सदी में मल्टी स्पोर्ट्स इवेंट में अच्छी-खासी तरक्की की है।

यहां एक बात गौर करने वाली है। इस दौरान इन खेलों में मेडल इवेंट्स की संख्या में भी इजाफा हुआ है। कई नए खेलों को इनमें जगह मिली है। उदाहरण के तौर पर क्रिकेट जिसमें भारत ने एशियन गेम्स-2026 में दो गोल्ड जीते। अगले ओलंपिक्स में भी क्रिकेट की वापसी हो रही है।

महिलाओं ने दिखाया दम

भारत की इस सफलता का श्रेय महिलाओं को भी जाता है। अगर यह कहा जाए कि ज्यादा जाता है तो गलत नहीं होगा क्योंकि 2000 के बाद से महिलाओं ने काफी ऐतिहासिक सफर तय किया है फिर चाहे मैरी कॉम का मुक्केबाजी में ओलंपिक ब्रॉन्ज हो या साक्षी मलिक, पीवी सिंधू, मनु भाकर का ओलंपिक मेडल जीतना। इसका एक कारण महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी है। इसे एशियाई खेलों के आंकड़ों से समझते हैं। साल 1951 में जब नई दिल्ली से एशियन गेम्स की शुरुआत हुई थी तब भारतीय दल में 29 पुरुषों के मुकाबले दो महिलाओं का अनुपात था। इसे मेडल के हिसाब से देखा जाए तो यह 14 पुरुष मेडल पर एक महिला मेडल था। जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ता गया ये अंतर भी कम होता गया। खेलों में महिलाओं का हिस्सा लेना और मेडल जीतना आम हो गया।

चीन के हांगझोऊ में खेले गए पिछले एशियन गेम्स में भारत के पुरुषों ने तकरीबन 38 मेडल जीते थे और महिलाओं ने 28। साल 1951 में जो आंकड़ा 14:1 था वो अब तकरीबन 1:1 का हो गया।

2002 के बाद गोल्ड मेडल की संख्या में इजाफा

मेडल तो भारत जीत रहा है, लेकिन दबदबा उसका माना जाता है जिसके हिस्से ज्यादा गोल्ड आते हैं। मेडल टैली में स्थान गोल्ड मेडल की संख्या को देखने पर ही तय होते हैं। यहां भी भारत ने 21वीं सदी में सफलता हासिल की है। 2002 से भारत एशियन गेम्स में लगातार गोल्ड जीत रहा है और अच्छी बात यह है कि कभी भी यह संख्या 10 से नीचे नहीं गई है। 2002 में भारत ने एशियन गेम्स में 11 गोल्ड मेडल जीते। 2006 में भारत के हिस्से 10 गोल्ड मेडल आए। 2010 में ये संख्या 14 तक पहुंची। 2014 में भारतीय खिलाड़ियों ने 11 सोने के तमगे जीते। 2018 में ये संख्या बढ़कर 16 हो गई और 2022 में 28 पहुंच गई जो अभी तक सबसे ज्यादा है। इस बार भारत के हिस्से 21 गोल्ड आए।

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