लोग फेंकते थे पत्थर, अब तय किया सिल्वर तक का सफर... 24 साद बाद AFG को पहला पदक दिलाने वाली फरीबा की दर्दभरी कहानी
एशियाई खेलों में 24 साल बाद अफगानिस्तान के लिए पहला पदक जीतने वाली महिला बनीं फरीबा ने बयां की रूढ़िवादी लोंगों से खुद को बचाने की दास्तां।

फरीबा
HighLights
फरीबा ने 24 साल बाद अफगानिस्तान के लिए जीता पहला पदक
फरीबा ने बयां की रूढ़िवादी लोंगों से खुद को बचाने की दास्तां
अभ्यास के दौरान फरीबा पर कई बार लोगों ने पत्थर, बोतल फेंके
प्रेट्र, नई दिल्ली। एशियाई खेलों में पिछले सप्ताह रजत पदक जीतने वाली अफगानिस्तान की साइकलिस्ट फरीबा हाशमी ने यहां तक का सफर करियर की शुरुआत में राह के पत्थरों और से नहीं बल्कि रूढ़िवादी लोगों द्वारा उन पर फेंके गए पत्थरों और बोतलों से बचते-बचते तय किया है।
इस उपलब्धि के साथ हाशमी न सिर्फ अफगानिस्तान से साइकलिंग में इन खेल में पदक जीतने वाली वाली पहली खिलाड़ी बन गई हैं, बल्कि 2002 के बाद से एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली अपने देश की पहली महिला खिलाड़ी भी बन गईं हैं।
जब फरीबा हाशमी के पिता ने उन्हें पहली बार साइकिल चलाने की कोशिश करते देखा, तो उन्हें सबसे पहले यह डर नहीं लगा कि वह गिरकर घायल हो सकती हैं। उन्हें डर इस बात का था कि अगर रूढ़िवादी अफगान समाज में किसी को इसकी भनक लग गई, तो उनके साथ क्या होगा।
हुआ भी यही, अभ्यास के दौरान फरीबा पर कई बार लोगों ने पत्थर, बोतल फेंके। पहचान छुपाने को फरीबा को पुरुषों के कपड़े पहनकर साइकिल लेकर निकलना पड़ा और अंत में 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने पर उन्हें देश भी छोड़ना पड़ा।
अब इटली में रह रहीं फरीबा ने अपनी इस जीत पर कहा कि फरीबा चाहती हैं कि देश से और भी फरीबा (उनके जैसी और महिलाएं) आगे आएं। लॉस एंजिलिस ओलिंपिक में यह भी मेरे बड़े सपनों में से एक होगा।
