एशियन गेम्स के मेडल ने दी दीक्षा डागर को राहत, अब बिना दबाव और ज्यादा आजादी से खेलने को हैं तैयार
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक रजत पदक जीतने के बाद दीक्षा डागर ने राहत महसूस की है। उनका कहना है कि ...और पढ़ें

दीक्षा डागर ने एशियन गेम्स-2026 में रचा इतिहास

समय कम है?
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अभिषेक उपाध्याय, स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में जापान के आइची-नागोया में खेले गए एशियन गेम्स-2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने कई ऐतिहासिक प्रदर्शन किए। उन्हीं में से एक था देश की महिला गोल्फ टीम का सिल्वर मेडल जीतना। भारतीय महिला गोल्फ टीम ने पहली बार एशियन गेम्स में यह पदक जीता था और इसने खिलाड़ियों को नया आत्मविश्वास दिया है। टीम की सदस्य रहीं दीक्षा डागर ने कहा है कि वह अब पहले से ज्यादा स्वतंत्र और दबाव रहित महसूस कर रही हैं।
दीक्षा, प्रणवी उर्स और अदिति अशोक की टीम ने देश की झोली में यह ऐतिहासिक पदक डाला। इस मेडल ने बताया है कि महिला गोल्फ में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है वो दिन भी दूर नहीं जब इन खेलों में भारतीय महिलाएं गोल्ड जीतकर लौटेंगी।
मेडल जीतकर हैं खुश
दीक्षा ने कहा है कि वह एशियन गेम्स में मेडल जीतने की हकदार थीं और अब वह काफी संतुष्ट महसूस कर रही हैं। दिल्ली गोल्फ क्लब में डीपी वर्ल्ड इंडिया चैंपियनशिप द्वारा एडेप्टिव गोल्फ एलियांस फाउंडेशन को समर्थन मुहैया कराए जाने के कार्यक्रम से इतर दीक्षा ने दैनिक जागरण ऑनलाइन से बात करते हुए कहा कि वह एशियन गेम्स में मेडल जीत बेहद खुश हैं।
उन्होंने कहा, "एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं संतुष्ट महसूस कर रही हूं। मुझे लगता है कि मैं इसकी हकदार थी। पिछले टूर्नामेंट में मैं अच्छी फॉर्म में थी। मैं लेडीज यूरोपियन टूर भी जीत गई थी। यह समय की बात है। वहां पर हम तीन मेडल भी जीत सकते थे। हम लड़कियां अच्छा कर रही हैं यह देखकर अच्छा लग रहा है। जीतने के बाद मैं और ज्यादा आजाद और आराम महसूस कर रही हूं। मुझ पर किसी तरह का दबाव नहीं है। मैं अब गोल्फ को और स्वतंत्रता से खेल सकती हूं।"
भारत और यूरोप में खेलने में अंतर
दीक्षा भारतीय महिला गोल्फ में जाना-माना नाम बन चुकी हैं। वह यूरोपियन टूर में भी खेलती हैं और वहां भी अच्छा करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं। दीक्षा से जब यूरोप और भारत में खेलने को लेकर अंतर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यूरोप की परिस्थितियां काफी अलग और चुनौतीपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा, "यूरोपियन टूर पर काफी ज्यादा मुश्किल प्रतिस्पर्धा है और माहौल भी काफी प्रतिस्पर्धी है। वहां पर गोल्फ कोर्स काफी अलग हैं। यूरोप में स्थिति अलग है, वहां काफी तेज हवा चलती है। भारत में खेलना यूरोप में खेलने से काफी अलग है। यहां गोल्फ कोर्स छोटे हैं। यहां ग्रीन्स भी काफी छोटी हैं तो यहां खेल अलग होता है।"
डीजीसी में क्या हो रणनीति?
भारत के ऐतिहासिक दिल्ली गोल्फ क्लब में 15 से 18 अक्टूबर के बीच इंडिया चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा है। दीक्षा से जब एक गोल्फर के तौर पर इस कोर्स पर सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह काफी अलग कोर्स है क्योंकि यह काफी संकरा है।
उन्होंने कहा, "दिल्ली गोल्फ कोर्स भारत में सबसे मुश्किल कोर्सों में से एक है। यह बहुत संकरा है। मैंने यूरोप, एशिया, अफ्रीका के बहुत सारे गोल्फ कोर्स में खेला है, लेकिन कभी इस तरह का कोर्स नहीं देखा। यह ऐसा गोल्फ कोर्स है कि आप यहां पर आक्रामक नहीं हो सकते। आपको यहां पर सटीकता पर ध्यान देना होगा। आप सीधा मारना होगा, छोटा रखकर खेलना होगा।"
