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चिकिता ने एशियन गेम्‍स 2026 में दो गोल्‍ड मेडल जीते, पिता के कहने पर मनपसंद कराटे को छोड़कर अपनाई तीरंदाजी

Published: Wed, 30 Sep 2026 11:16 PM (IST)

चिकिता तानीपर्थी ने पहली बार एशियन गेम्‍स में हिस्‍सा लिया और दो गोल्‍ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। चिकिता ने अपने पिता के फैसले को सही साबित किया।

चिकिता तानीपर्थी

चिकिता तानीपर्थी

HighLights

  1. पिता की वजह से चिकिता ने कराटे के बजाय तीरंदाजी चुनी

  2. चिकिता स्कूल में छठी से आठवीं कक्षा तक कराटे खेलती थीं

  3. अभिषेक वर्मा ने चिकिता की जिंदगी में बड़ी भूमिका निभाई

प्रेट्र, नागोया। पहली बार एशियाई खेलों में उतरी चिकिता तानीपर्थी ने दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा की झलक तो दिखाई ही। साथ ही अपने पिता के फैसले को भी सही साबित कर दिया, जिन्होंने स्कूली दिनों में उन्हें तीरंदाजी चुनने को कहा था जबकि उनकी रूचि कराटे में थी।

तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव की रहने वाली 21 वर्ष की चिकिता ने ज्योति सुरेखा वेन्नम और प्रिथिका प्रदीप के साथ महिला टीम वर्ग का स्वर्ण जीता और साहिल जाधव के साथ मिक्स्ड टीम स्पर्धा में भी अव्वल रही। उन्होंने कहा कि तीरंदाज बनने का फैसला मेरा नहीं था, यह मेरे पिता की पसंद थी।

पिता के सपने को किया साकार

चिकिता ने कहा कि उनके पिता चाहते थे कि मैं खिलाड़ी बनूं, क्योंकि उनका यह सपना अधूरा रहा था। जब मैं छोटी थी, तब वह मुझे मैदान पर ले जाते थे। रोज हम कोई खेल खेलते थे। उन्होंने कहा कि स्कूल में छठी से आठवीं कक्षा तक मैं कराटे खेलती थी। मेरे पास पहला ब्लैक बेल्ट भी है।

उनका पहला तोहफा तीर कमान था जो उनके चाचा ने दशहरे पर दिया था। उन्हें धीरे धीरे तीरंदाजी में मजा आने लगा। उन्होंने कहा कि दशहरे की छुट्टी में मेरे चाचा हैदराबाद से मेरे लिए रिकर्व डेकॉथलन तीर लेकर आए थे। मुझे धीरे-धीरे तीरंदाजी में मजा आने लगा। उनके पिता ने उनके भीतर क्षमता देखकर कर्ज लेकर अच्छे उपकरण खरीदे।

साइना को देख इच्‍छा हुई प्रबल

चिकिता ने 2018 से तीरंदाजी शुरू की और 2021 में जूनियर शिविर में चुन ली गई। चिकिता के पिता हमेशा से चाहते थे कि वह व्यक्तिगत खेल में उतरे। हैदराबाद की साइना नेहवाल ने जब ओलिंपिक में बैडमिंटन में भारत के लिए पहला पदक जीता तो उनकी इच्छा और प्रबल हो गई।

चिकिता ने कहा कि साइना नेहवाल के ओलिंपिक पदक जीतने के बाद उन्होंने तय किया कि मैं कराटे की बजाय तीरंदाजी में उतरूंगी। उस समय मैं स्कूल में थी और मैने अभिषेक वर्मा सर की पत्नी को मैसेज किया।

उन्होंने मुझे बुलाया और पांच दिन अभ्यास के बाद मेरा सोनीपत में शिविर में चयन हो गया। अभिषेक वर्मा सर ने मेरी काफी मदद की और मुझे सिखाया, वह मेरी प्रेरणा रहे।

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