नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। भारत अभी हाल ही में ऐतिहासिक थामस कप जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बना है। फानइल में उसने इंडोनेशिया को 3-0 से हराकर ये उपलब्धि हासिल की है। कोच पुलेला गोपीचंद ने तो इसे बैडमिंटन के लिए 1983 वर्ल्ड कप क्रिकेट से बड़ी जीत बताया। गोपीचंद एक ऐसा नाम हैं जो हालिया कुछ वर्षों में भारतीय बैडमिंटन की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलकर रख दी है। इतिहास रचने वाली भारतीय टीम के आधे खिलाड़ी उन्हीं के स्पोर्ट्स अकैडमी से आते हैं। अब ओडिशा में उनके स्पोर्ट्स अकैडमी का काम लगभग पूरा हो गया है और सितंबर तक वो शुरू भी हो जाएगा। ये अकैडमी बहुप्रसिद्ध कलिंगा कांप्लेक्स में मौजूद है जो गोपीचंद के देखरेख में तैयार हुई है।

खेल मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी कर कहा गया कि भुवनेश्वर में "डालमिया भारत गोपीचंद ओडिशा बैडमिंटन अकैडमी" का निर्माण जोरों पर चल रहा है और सितंबर में पूरा हो जाएगा। इसके बाद यह जल्द ही शुरू भी हो जाएगा। ओडिशा सरकार की तरफ से इसके लिए 3 एकड़ की भूमि आवंटित की गई थी। 55 करोड़ की लागत से ये अकैडमी बनाई जा रही है। आधूनिक तकनीक से लैस इस अकैडमी में 8 बैडमिंटन कोर्ट बनाए गए हैं जबकि 500 लोगों के बैठने की जगह है। इस अकैडमी को इस तरह से बनाया गया है कि यहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मैचों का भी आयोजन किया जा सकता है।

इसमें खिलाड़ियों, कोचों और सहायक कर्मचारियों के लिए एक व्यायामशाला, बोर्डिंग और लाजिंग की सुविधा के अलावा एक स्पोर्ट्स साइंस रूम और एक हेल्थ क्लब भी होगा।

इस अकैडमी से भारतीय बैडमिंटन को होगा फायदा

इस अकैडमी के शुरू होने से भारतीय बैडमिंटन को फायदा होगा। गोपीचंद के देखरेख में बने इस अकैडमी में ज्यादा से ज्यादा युवा खिलाड़ियों को खेलने का मौका मिलेगा और उनके प्रशिक्षण में साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और किदांबी श्रीकांत और लक्ष्य सेन जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी निकलेंगे और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रौशन करेंगे।

Edited By: Sameer Thakur