शानदार शुक्रवार : जूडो में भारत का 'गोल्डन डबल', ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजों का विजयी पंच
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए शुक्रवार का दिन शानदार रहा। भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने इतिहास रचते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

अस्मिता डे और हर्ष सिंह

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जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए शुक्रवार का दिन शानदार रहा। भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने इतिहास रचते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए तो मुक्केबाजी में जैस्मीन लैंबोरिया (57 किग्रा), प्रीति पवार (54 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और जादुमणि सिंह (55 किग्रा) ने फाइनल में प्रवेश करते हुए कम से कम रजत पदक पक्के कर लिए।
अस्मिता और हर्ष के स्वर्ण ने भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या को पांच तक पहुंचा दिया। त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में कनाडा की हाइडी क्वाच को रोमांचक गोल्डन स्कोर मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक जीता।
फाइनल में अस्मिता की शुरुआत अच्छी नहीं रही। शुरुआती दौर में उन्होंने एक युको अंक गंवाया और फिर पेनाल्टी मिलने से कनाडाई खिलाड़ी बढ़त पर पहुंच गईं। लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया।
निर्धारित चार मिनट में कोई भी निर्णायक अंक नहीं बना, जिसके बाद मुकाबला गोल्डन स्कोर में पहुंचा। यहां अस्मिता ने दबाव में बेहतरीन आक्रमण करते हुए एक और युको हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
23 वर्षीय हर्ष सिंह ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने कई बार के ओशिनिया चैंपियन, पूर्व ओलंपियन और बर्मिंघम 2022 के कांस्य पदक विजेता जोशुआ काट्ज को हराया। हर्ष ने मुकाबला खत्म होने से 41 सेकेंड पहले शानदार वाजा-अरी दांव लगाकर बढ़त बनाई और फिर अंत तक उसे बरकरार रखते हुए ऐतिहासिक स्वर्ण जीत लिया।
'गोल्डन डबल' लगाने उतरेंगे मुक्केबाज शुक्रवार को जैस्मीन, जादुमणि, अंकुश, प्रीति और अरुंधति ने अपने-अपने वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबलों में एकतरफा जीत दर्ज की। शनिवार को ये सभी स्वर्ण पदक जीतने के लिए रिंग में उतरेंगे। 10 भारतीय मुक्केबाज सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ पहले ही 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता को पीछे छोड़ चुके हैं। बर्मिंघम में मुक्केबाजी में भारत को सात पदक मिले थे, जिनमें से तीन स्वर्ण पदक थे।
