धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदाजी विश्व कप जीतकर रचा इतिहास, पुरुष रिकर्व में गोल्ड मेडल जीतने वाले बने पहले भारतीय
धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में पुरुष रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया, वे यह ...और पढ़ें

धीरज बोम्मादेवरा

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। रविवार, 13 सितंबर भारत के स्पोर्ट्स के लिए बेहद खास दिन रहा। इस दिन भारतीय टीम ने अलग-अलग खेलों में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाया। जूनियर हॉकी एशिया कप 2026 में भारत की पुरुष और महिला टीमों ने खिताब जीता। इसके अलावा भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने महिला एशिया कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम की। तीरंदाजी में भी भारत के खिलाड़ी ने इतिहास रच दिया।
आंध्र प्रदेश के धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में पुरुष रिकर्व वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वे विश्व कप में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं। 25 वर्षीय खिलाड़ी ने फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को शूट-ऑफ में हराया।
विश्व कप का फाइनल रहा रोमांचक
फाइनल में धीरज का सामना जापान के नाकानिशी जुन्या से हुआ। विश्व रैंकिंग में दसवें स्थान पर रहने वाले धीरज ने 20वें स्थान वाले जापानी खिलाड़ी को 6-5 से हराया। मैच पांच सेट तक चला और आखिर में शूट-ऑफ में फैसला हुआ। नाकानिशी ने शुरूआत अच्छी की और पहले दो सेट में 3-1 की बढ़त बना ली।
धीरज ने तीसरे सेट में 29 अंक हासिल कर स्कोर बराबर कर दिया। चौथे सेट में जापानी खिलाड़ी ने परफेक्ट शूटिंग कर 5-3 की लीड ले ली। पांचवें सेट में धीरज ने सिर्फ दो अंक गवाए, जबकि नाकानिशी ने 27 अंक बनाए। इससे स्कोर 5-5 हो गया और मैच शूट-ऑफ में पहुंच गया। शूट-ऑफ में धीरज ने परफेक्ट 10 लगाया, जबकि नाकानिशी 9 पर रुक गए। इस तरह धीरज ने ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया।
क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल में दमदार प्रदर्शन
धीरज ने अपना अभियान क्वार्टरफाइनल से शुरू किया। तुर्की के बर्किम ट्युमर के खिलाफ उन्होंने 7-1 से जीत दर्ज की। उन्होंने एक भी सेट नहीं गंवाया। सेमीफाइनल में फ्रांस के रियो ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट जीन-चार्ल्स वल्लादोंट का मुकाबला था। यहां भी धीरज ने 7-1 से जीत हासिल की। उन्होंने आखिरी छह तीरों में सिर्फ दो अंक गवाए और फाइनल में जगह बनाई।
16 साल का इंतजार खत्म
यह जीत सिर्फ धीरज की व्यक्तिगत सफलता नहीं है। इससे पहले 2010 में एडिनबर्ग में जयंत तालुकदार ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उसके बाद 16 साल तक किसी भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज ने विश्व कप फाइनल में पदक नहीं जीता था। धीरज ने अब गोल्ड जीतकर इस सूखे को खत्म कर दिया।
