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मंगल मुद्दा: बिहार-झारखंड में खतरनाक ट्रेंड टावर पर चढ़ जाने का, जिद मनवाने की सनक पड़ती है भारी

Published: Tue, 21 Jul 2026 10:21 AM (IST)

झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए मोबाइल या बिजली के टावर पर चढ़ ...और पढ़ें

झारखंड में टावर पर चढ़ने का खतरनाक ट्रेंड जिद मनवाने की सनक या सामाजिक समस्या। (फोटो: जागरण फाइल)

झारखंड में टावर पर चढ़ने का खतरनाक ट्रेंड जिद मनवाने की सनक या सामाजिक समस्या। (फोटो: जागरण फाइल)

HighLights

  1. लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए टावर पर चढ़ रहे हैं।

  2. यह त्वरित प्रसिद्धि और प्रशासनिक निराशा का परिणाम है।

जागरण टीम, रांची। झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में इन दिनों एक विचित्र सामाजिक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। कभी महंगी गाड़ी की मांग पूरी नहीं होने पर, कभी प्रेम-विवाह की जिद में, तो कभी जमीन के म्यूटेशन, नौकरी या अन्य प्रशासनिक समस्याओं से नाराज होकर लोग 150 फीट ऊंचे मोबाइल अथवा बिजली के टावर पर चढ़ जा रहे हैं।

देखते ही देखते पूरा गांव जुट जाता है, पुलिस-प्रशासन सक्रिय हो जाता है और कई बार मंत्री-विधायकों तक को हस्तक्षेप करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल सनक या आवेग का मामला नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक व्यवहार, त्वरित प्रसिद्धि की चाह और अपनी बात को प्रभावी ढंग से मनवाने की मानसिकता का परिणाम है।

सोशल मीडिया के दौर में ऐसे घटनाक्रम तुरंत वायरल हो जाते हैं, जिससे कुछ लोगों को लगता है कि सामान्य तरीके से अनसुनी रहने वाली उनकी मांग इस तरह सुर्खियों में आ सकती है। दूसरी ओर, पारिवारिक संवाद की कमी, बढ़ती अधीरता, मानसिक तनाव और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से उपजी निराशा भी ऐसे कदमों को बढ़ावा दे रही है।

चिंता की बात यह है कि यह प्रवृत्ति जानलेवा होने के साथ-साथ समाज में गलत संदेश भी देती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संवाद, संवेदनशील प्रशासन और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही इस खतरनाक “टावर ट्रेंड” पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

केस एक: प्रेमी का इंतजार पड़ा भारी, 60 फीट ऊंचे बिजली पोल पर चढ़ी युवती

गुमला में प्रेमी के मिलने नहीं पहुंचने से नाराज एक युवती गत तीन जून को 60 फीट ऊंचे विद्युत पोल पर चढ़ गई, जिससे इलाके में घंटों अफरातफरी का माहौल बना रहा। जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेमी से मिलने बाईपास रोड स्थित बायो पार्क पहुंची थी, लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद उसके नहीं आने पर वह नाराज होकर वहां से निकल गई।

इसके बाद नदी टोली के समीप हाईटेंशन लाइन के पोल पर चढ़कर उसने प्रेमी को मौके पर बुलाने की मांग शुरू कर दी। साथ ही चेतावनी दी कि उसकी बात नहीं मानी गई तो वह अपनी जान को खतरे में डाल सकती है।

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और वीडियो बनाने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने माइक के जरिए उसे समझाने की कोशिश की। आखिरकार पुलिसकर्मी पोल पर चढ़े और युवती को सुरक्षित नीचे उतार लिया। बाद में पूछताछ के बाद उसे स्वजन के हवाले कर दिया गया। राहत की बात रही कि उस समय पोल में बिजली प्रवाहित नहीं हो रही थी।

केस दो: म्यूटेशन की मांग पर 150 फीट टावर पर चढ़ा युवक, 10 घंटे हंगामा

हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड अंतर्गत बानादाग में जमीन के म्यूटेशन को लेकर गत पांच जून को एक युवक 150 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। चतरा जिले के टंडवा निवासी विकास कुमार हाथ में तिरंगा और बैनर लेकर टावर पर चढ़ा और म्यूटेशन होने तक नीचे नहीं उतरने की घोषणा कर दी।

उसके समर्थन में सैकड़ों ग्रामीण जुट गए तथा अंचल कार्यालय पर भ्रष्टाचार और बिचौलियों के प्रभाव का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर नारेबाजी करने लगे। करीब 10 घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। विकास का आरोप था कि फतहा मौजा स्थित उसकी पांच एकड़ जमीन का म्यूटेशन छह माह से लंबित है, जबकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस और प्रशासन लगातार उसे समझाते रहे। अंततः सिमरिया विधायक उज्जवल दास के हस्तक्षेप और मामले की जांच व समाधान के आश्वासन के बाद वह दोपहर में सुरक्षित नीचे उतर आया।

केस तीन: स्पोर्ट्स बाइक की जिद में टावर पर चढ़ा किशोर, छह घंटे चला ड्रामा

रांची के इटकी में 16 वर्षीय एक किशोर अपने पिता से स्पोर्ट्स बाइक खरीदवाने की जिद में पांच जून को चार लाख केवी क्षमता वाले नेशनल ग्रिड के हाईटेंशन बिजली टावर पर चढ़ गया। रानीडीह गांव निवासी शशि उरांव 400 सीसी की बाइक नहीं मिलने से नाराज होकर टावर के ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया और बिजली तारों के पास बैठा रहा।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। किसी अनहोनी से बचने के लिए नेशनल पावर ग्रिड की बिजली आपूर्ति रोकनी पड़ी, जिससे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों में कई घंटे तक बिजली प्रभावित रही।

करीब छह घंटे तक चले हाई वोल्टेज ड्रामे के दौरान लोगों ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। अंततः उसके पिता बुधवा उरांव खुद टावर पर चढ़े और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया। पुलिस ने इस तरह की खतरनाक हरकतों से बचने की अपील की है।

केस चार: गिरिडीह में प्रेमी, गोमो में प्रेमिका टावर पर चढ़ी

धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र में 17 मई को प्रेम विवाह की जिद को लेकर प्रेमी युगल ने अलग-अलग जगहों पर मोबाइल टावर पर चढ़कर घंटों हाईवोल्टेज ड्रामा किया। पहले गिरिडीह के निमियाघाट में जामताड़ा निवासी सुनील महतो प्रेमिका से शादी कराने की मांग को लेकर टावर पर चढ़ गया। काफी मशक्कत के बाद उसे नीचे उतारकर पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

इसकी जानकारी मिलते ही बोकारो के नावाडीह क्षेत्र की रहने वाली उसकी प्रेमिका देवंती कुमारी गोमो के हरिहरपुर थाना क्षेत्र स्थित बिशुनपुर में करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। वह तीन घंटे तक टावर पर डटी रही और प्रेमी को छोड़ने तथा उससे विवाह कराने की मांग करती रही।

पुलिस और ग्रामीणों के समझाने पर वह नीचे उतरी, जहां बेहोश हो गई। युवती का दावा है कि दोनों ने मार्च में गुजरात में शादी कर ली थी। हालांकि सुनील पहले से शादीशुदा है।

Jharkhand drama

एक्सपर्ट व्यू: ऐसा करना पड़ता है भारी, कानून में सजा और जुर्माने का प्रावधान

महंगी बाइक की मांग, प्रेम-विवाह की जिद, नौकरी, जमीन विवाद या प्रशासनिक समस्याओं को लेकर मोबाइल अथवा बिजली के टावर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देना केवल सनसनीखेज घटना नहीं, बल्कि कानून की नजर में अपराध भी है।

हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए जान देने की धमकी देते हैं और पुलिस-प्रशासन को घंटों मशक्कत करनी पड़ती है। पूर्व में ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 309 के तहत कार्रवाई होती थी, लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग धाराओं का प्रविधान किया गया है।

यदि कोई व्यक्ति प्रेम-विवाह, मोबाइल, वाहन या अन्य मांग पूरी नहीं होने पर टावर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देता है तो उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 292 के तहत सार्वजनिक उपद्रव (पब्लिक न्यूसेन्स) का मामला दर्ज हो सकता है। इसमें जुर्माने का प्रविधान है, जबकि दोबारा अपराध करने पर छह माह तक की सजा और अधिक जुर्माना लगाया जा सकता है।

वहीं, किसी गलत या गैरकानूनी कार्य के लिए दबाव बनाने की नीयत से आत्महत्या की धमकी देने पर बीएनएस की धारा 226 लागू हो सकती है। इसमें एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना, सामुदायिक सेवा या तीनों दंड दिए जा सकते हैं। कानून स्पष्ट करता है कि आत्महत्या की धमकी देकर दबाव बनाना अधिकार नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध है।

-असीत मोदी, पूर्व प्रशिक्षक, अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय, होटवार (रांची)

क्या कहता है मनोविज्ञान: अधीरता, तनाव और वायरल संस्कृति का खतरनाक मेल

टावर या अन्य ऊंची जगहों पर चढ़कर अपनी मांग मनवाने की कोशिश केवल एक व्यक्तिगत आवेग नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक व्यवहार का संकेत है। ऐसे मामलों में व्यक्ति अक्सर खुद को असहाय, उपेक्षित या निराश महसूस करता है और उसे लगता है कि सामान्य तरीके से उसकी बात नहीं सुनी जाएगी। ऐसे में वह ऐसा कदम उठाता है, जिससे तत्काल लोगों और प्रशासन का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो।

इंटरनेट मीडिया और वायरल संस्कृति ने इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दिया है। जब लोग देखते हैं कि किसी व्यक्ति के टावर पर चढ़ने की घटना को व्यापक प्रचार मिला और उसकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई हुई तो कुछ अन्य लोग भी इसे प्रभावी माध्यम मानने लगते हैं।

मनोविज्ञान में इसे कापीकैट बिहेवियर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि बढ़ता मानसिक तनाव, पारिवारिक संवाद की कमी, सामाजिक दबाव, अधीरता तथा समस्याओं के समाधान में देरी भी ऐसे जोखिमपूर्ण व्यवहार को जन्म देती है। यह प्रवृत्ति चिंता का विषय है क्योंकि इसमें व्यक्ति के जीवन को खतरा होता है और समाज में गलत संदेश जाता है।

इसे रोकने के लिए परिवारों को संवाद बढ़ाना होगा, प्रशासन को शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना होगा तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी।

-डाॅ. सिद्धार्थ सिन्हा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक, रिनपास

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