संवाद सूत्र, सुंदरगढ़ : आज दुनिया में सौंदर्य, आलोक, सच्चाई, प्रेम, शांति की आवश्यकता है, पर कहां है यह। हम एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़ में हैं, एक दूसरे से ऊंचा उठने की होड़ में हैं। संसार को इस तुलना और स्पर्धा की भावना से नहीं, बल्कि सहयोग से चलाया जा सकता है। पृथ्वी को बचाना है, तो हमें बचना होगा ऐसे कार्यों से जो इसे नष्ट करते हैं। हम प्लास्टिक की बोतल में पानी पीकर बोतलों को पर्यावरण नष्ट करने के लिए फेंकते रहेंगे तो चक्रवात फणि आना ही है। सुंदरगढ़ सरकारी महाविद्यालय के हीरक जयंती समारोह के समापन उत्सव में राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने अपने संबोधन के जरिये पुरातन व वर्तमान विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के साथ प्रेम, शांति और अहिसा के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने प्रभु जगन्नाथ की भूमि ओडिशा को पवित्र बताते हुए कहा कि यदि विश्व में कोई शांति ला सकता है, तो वो भारत देश है। भारत में वो प्रभु जगन्नाथ की धरती ओडिशा है।

मौसम खराब होने के चलते समय से पूर्व शुरू समापन समारोह की शुरुआत ं प्रधान अध्यापक डॉ. किशोर कुमार दास के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने महाविद्यालय को केंद्रीय आदिवासी विश्वविद्यालय में तब्दील करने का आग्रह राज्यपाल से किया। विधायक कुसुम टेटे ने भी इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी की मान्यता देने का अनुरोध किया। राज्यपाल ने कहा कि यहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्राइबल खोले जाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। विधायक डॉ. राजेन एक्का, पश्चिम ओडिशा विकास परिषद अध्यक्ष सुभाष चौहान ने भी विचार रखे।

इस अवसर पर राज्यपाल ने डालमिया सीमेंट कंपनी के सुनील गुप्ता, महाविद्यालय के प्रथम व द्वितीय छात्र संसद अध्यक्ष क्रमश: शिवशंकर पृषेठ व नीलाबर पटेल एवं नाट्यकार, फिल्म निर्माता निर्देशक प्रदीप भोल को सम्मानित करने समेत स्मारिका का विमोचन भी किया। नाजनीन आजाद के संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिलाधीश निखिल पवन कल्याण, आरक्षी अधीक्षक सौम्या मिश्र, आयोजक कमेटी अध्यक्ष गौरीशंकर पटेल, महासचिव अभिमन्यु बेहरा, कार्यकारी अध्यक्ष दिलीप पटेल प्रमुख उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

मौसम की खराबी से राज्यपाल की उड़ान में विलंब : मौसम के अचानक करवट लेने से सुबह से ही असमान पर बादल छाए रहे। दोपहर तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होने के कारण सरकारी महाविद्यालय के कार्यक्रम में राज्यपाल जल्दी पहुंच गए। ताकि जल्दी वापस जा सकें। लेकिन वापसी के समय मौसम का मिजाज ठीक नहीं होने से हेलीकॉप्टर को सिग्नल नहीं मिल पाने से राज्यपाल को हेलीपैड से वापस महाविद्यालय लौटना पड़ा। बाद में मौसम में सुधार होने पर अपराह्न साढ़े तीन बजे राज्यपाल हेलिकॉप्टर से भुवनेश्वर के लिए रवाना हुए।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस