संवाद सूत्र, राजगांगपुर : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की तर्ज पर गणेशोत्वस मनाने के लिए प्रसिद्ध सीमेंटनगरी राजगांगपुर में सभी तैयारी पूरी हो चुकी है। पंडाल व प्रतिमा निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। इस उत्सव को शहर के लोगों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। 13 सितंबर से शुरू गणेशोत्सव सात दिन तक चलेगा। जिसके बाद 20 सितंबर को गणेश प्रतिमा का विसर्जन होगा।

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72 साल पुराना है सीमेंटनगरी में गणेशोत्सव का इतिहास:

सीमेंटनगरी राजगांगपुर में गणेशोत्सव का इतिहास 72 साल पुराना है। जिसमें राजगांगपुर की सार्वजनिक गणेश पूजा कमेटी सबसे पुरानी पूजा कमेटी है। देश की आजादी से एक वर्ष पूर्व सन 1946 में यहां पहली बार गणेश चतुर्थी पर गणेश पूजा की गई थी। जिसमें पन्नालाल अग्रवाल, केदार अग्रवाल व नथमल अग्रवाल ने इसकी शुरुआत की थी। इस दौरान कम्युनिटी सेंटर में मिट्टी से बने पंडाल में पूजा होती थी। 1956 में यहां पक्का पंडाल बनाने के बाद सार्वजनिक पूजा कमेटी के नाम से पूजा होने लगी। यहां पर 50 साल पूरे होने पर सन 1996 में स्वर्ण जयंती धूमधाम से मनी थी।

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पांच से 25 लाख तक होता है पूजा का बजट :

वर्तमान समय में शहर में 100 से भी ज्यादा छोटे बड़े पंडालों का निर्माण कर विघ्नहर्ता की पूजा होती है। पूजा का बजट पांच लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक होता है। खासकर आकर्षक पूजा पंडाल तथा तोरणद्वार बनाने को लेकर पूजा कमेटियों में होड़ लगी रहती है। बिजली की सजावट से सीमेंटनगरी पूरी तरह से दुल्हन के रूप में सज जाती है।

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इमरती-पेड़े खाओ, गणपति के गुण गाओ:

यहां के गणेशोत्सव की एक विशेषता यहां के प्रसाद की भी है। जिसमें गणेशोत्सव के दौरा पूजा कमेटियों द्वारा विभिन्न सुस्वादु व्यंजनों के साथ फास्ट फूड का भी प्रसाद भगवान को चढ़ाने और वितरण करने की परंपरा है। भक्तों को अलग-अलग दिनों में जलेबी, इमरती, पेड़े, खीर, पूड़ी, संदेश, आलूचाप, समोसे, चाउमिन, मंचूरियन, कचौड़ी व इडली-डोसा समेत व्यंजन रूपी प्रसाद वितरण होता है।

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विसर्जन जुलूस है गणेशोत्सव की शान:

राजगांगपुर में गणेशोत्सव की शान है यहां का विसर्जन जुलूस। यह देखने के लायक होता है। पूजा कमेटियों की ओर से बैंड बाजा, करतब तथा प्रसाद का वितरण किया जाता है। रास्ते में जगह - जगह सेवा शिविर भी लगाकर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया जाता है।

Posted By: Jagran