जागरण संवाददाता, राउरकेला : मंदी की मार से बेहाल सुंदरगढ़ जिले के स्पंज, फर्नेस एवं लौह संयंत्रों को अब अत्यधिक बिजली बिल भुगतान का नोटिस थमा दिया गया है। इससे जिले में संचालित 70 से अधिक उद्योगों में से छोट-बड़े 42 कारखाने बिजली बिल भुगतान में असमर्थता के कारण बंद कर दिये गये हैं।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा में बिजली दर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की तुलना में डेढ़ से दोगुना अधिक है। समान क्षमता वाले ओडिशा के उद्योगों को 90 लाख रुपये जबकि छत्तीसगढ़ में 60 लाख एवं झारखंड में 55 लाख रुपये देना पड़ता है। ऐसे में उद्योगपतियों का उन प्रदेशों में पलायन हो रहा है। ओडिशा के उद्योगों को सरकार की ओर से सब्सिडी प्रदान करने के लिए राउरकेला चैंबर द्वारा मुद्दा उठाने के बावजूद कोई लाभ नहीं हुआ है।

चैंबर सूत्रों के अनुसार सुंदरगढ़ जिले में आरओ इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बजरंगबली एलायज लिमिटेड, बिसरा स्टील इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, चैतन्य इंडस्ट्रीज, आइपीआइ स्टील प्राइवेट लिमिटेड, जगन्नाथ स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, जय अंबे स्टील प्राइवेट लिमिटेड, जय जगन्नाथ कास्टिग प्राइवेट लिमिटेड, जिदल रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड, कलिग स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, खेदडिया इस्पात लिमिटेड समे 42 उद्योग बंद हो चुके हैं।

सुंदरगढ़ जिले के राजगांगपुर, कलुंगा, कुआरमुंडा, कांसबहाल, चिकटमाटी आदि क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित किये गए थे जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलने के साथ आíथक स्थिति में भी काफी सुधार आया। लेकिन एक साल से उद्योगों पर बिजली शुल्क का बोझ बढ़ने से राजगांगपुर स्थित अष्ट विनायक इंजीनियर्स, शारदा शिवानी, चिकटमाटी स्थित मां लक्ष्मी स्टील, कांसबहाल स्थित राघवेन्द्र स्टील, कुआरमुंडा स्थित संघमित्रा आयरन स्टील आदि बंद हो चुके हैं। इसी तरह संबलपुर व झारसुगुड़ा के आसपास के उद्योगों पर इसका कुप्रभाव पड़ रहा है। राउरकेला व राजगांगपुर के आसपास के स्पंज व लौह उद्योग बंद किये जा रहे हैं।

सब्सिडी मिलने से ही कारोबार संभव : राउरकेला चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष प्रवीण गर्ग ने बताया कि अत्यधिक बिजली बिल से उद्योगों पर पड़ रहे प्रभाव की बात विभिन्न मंच पर रख चुके हैं पर कोई लाभ नहीं हुआ। इंडक्शन एवं ब्लॉस्ट फर्नेस में अधिक बिजली की खपत होती है जहां पिग आइरन, स्पंज आइरन एवं सिलको-मैग्नीज से इंगोट तैयार होता है। इंगोट का उपयोग रि-रोलिग मिल में छड़ बनाने में किया जाता है। सुंदरगढ़ में बिजली बिल 5.90 रुपये प्रति यूनिट है जबकि सरकार से डेढ़ से दो रुपये तक सब्सिडी मिलने के कारण झारखंड में 3.70 रुपये एवं छत्तीसगढ़ में 4.00 रुपये है। इस कारण वहां कम उत्पादन लागत में माल तैयार हो रहा है। प्रतिस्पर्धी बाजार में ओडिशा से कच्चामाल लेकर दूसरे राज्यों के उद्योगों में इंगोट तैयार कर रहे हैं एवं सस्ते में ओडिशा में इसकी आपूíत कर रहे हैं।

Posted By: Jagran

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