संबलपुर, जेएनएन। एक तरफ जहां धरती के भगवान कहे जाने वाले कई डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के नाम पर चांदी काटने में लगे हैं। वहीं वीर सुरेंद्र साय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च संस्थान, बुर्ला के डॉ. शंकर रामचंदानी ने विश्व एड्स दिवस से एक दिन पहले अपनी जेब से 50 हजार रुपये एक एड्स पीड़ित अनाथ बालक को देकर मिसाल पेश की है। पीड़ित बालक अपने एक रिश्तेदार के घर में रहकर आठवीं की कक्षा में पढ़ता है। 

ऐसा परोपकार डॉ. रामचंदानी ने पहली बार नहीं बल्कि कई बार किया है और मरीजों के बीच उनकी पहचान एक मसीहा के रूप में बन गई है। बारह वर्षीय पीड़ित बालक जब छह वर्ष का था तभी वर्ष 2013 में एड्स से उसके माता और पिता की मौत हो गयी थी। उस समय एक रिश्तेदार ने बालक को अपने घर ले आया और अपने साथ रखा। एड्स से पीड़ित होने के बावजूद बालक पढ़ाई में अच्छा है और बीमारी से लड़ाई लड़ रहा है। नियमित रूप से दवा भी ले रहा है। शनिवार को पीड़ित बालक जब अपनी दवा लेने बुर्ला मेडिकल हॉस्पिटल आया था।

तभी उसके बारे में डॉ. रामचंदानी को खबर लगी। उन्होंने बालक से मुलाकात कर उसके बारे में जाना। जब पता चला कि एड्स पीड़ित होने के बावजूद वह बालक बगैर उसकी परवाह किये रोग से लड़ने के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी है तब डॉ. रामचंदानी ने उसके इलाज और पढ़ाई के लिए 50 हजार रुपये दे दिए। पता चला है कि डॉ. रामचंदानी दो महीने पहले दो जुड़वां बेटियों के पिता बने हैं और ये रुपये उन्होंने बेटियों के जन्म पर पारिवारिक उत्सव के लिए रखा था, लेकिन एड्स पीड़ित बालक को देख उनका दिल पसीज गया और पारिवारिक उत्सव मनाने के बजाय रुपये उन्होंने पीड़ित बालक को देना बेहतर समझा।

डॉ. रामचंदानी के इस नेक कार्य की सर्वत्र प्रशंसा की जा रही है। इधर, 50 हजार रुपये की सहायता मिलने के बाद पीड़ित बालक ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि कोई उसकी ऐसी सहायता भी कर सकता है। उसने डॉ. रामचंदानी के ऐसे परोपकार को नमन करने समेत दूसरों को भी इससे प्रेरणा लेकर जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आने का आह्वान किया है।

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Posted By: Babita kashyap

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