ज्योति कुमार लाठ, बामड़ा:

देश की आजादी से पूर्व पहली अप्रैल, 1936 को ओडिशा को अलग राज्य की पहचान मिली थी। भाषा के आधार पर अलग राज्य बनने वाला ओडिशा देश का पहला राज्य है। ओडिशा को भाषा पर आधारित अलग राज्य का दर्जा दिलाने में बामड़ा राजा वासुदेव सुढलदेव का भी योगदान अतुलनीय रहा है। जिसमें अलग राज्य का गठन करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली संस्था उत्कल सम्मेलनी के गठन में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही थी। इसके समेत बामड़ा राजा के शासन काल में विकास का भी काफी काम हुआ था। जिससे डाक विभाग की ओर से गत 2011 में बामड़ा राजा का डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।

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पिता के काम को पुत्र ने बढ़ाया आगे:

ओडिशा को भाषा आधारित अलग राज्य की मान्यता प्रदान करने के लिए काम करने वाले संगठन उत्कल सम्मेलनी की बैठक 31 दिसंबर, 1903 को कटक में होनी थी। इस बैठक की अध्यक्षता के लिए बामड़ा राजा वासुदेव सुढलदेव को आमंत्रित किया गया था। लेकिन अध्यक्षता करने से पूर्व उसी वर्ष नवंबर महीने में उनका निधन हो गया था। जिससे इस बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन मयूरभंज के राजा ने की थी। उनके निधन के बाद उनके पुत्र त्रिभुवन गंगदेव की ओर से ओडिशा को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में हरसंभव सहयोग किया गया। जिसके बाद गत पहली अप्रैल, 1936 को अलग ओडिशा राज्य का गठन किया गया।

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विकास में बामड़ा राजा का योगदान अहम:

आजादी से पूर्व बामड़ा राजा वासुदेव सुढलदेव के शासन काल में विकास का काफी काम किया गया था। जिसमें बंगाल- नागपुर रेलवे लाइन का निर्माण करने के दौरान उनकी देखरेख में बामड़ा स्टेशन बना था। इसके समेत 1889 में राज्य का प्रथम प्रि¨टग प्रेस जगन्नाथ वल्लभ प्रेस की स्थापना भी उनके शासन काल में हुई थी। वहीं ओडिया साप्ताहिक पत्रिका हितैषिणी का प्रकाशन होता था। जिसमें केवल साहित्य चर्चा ही नहीं, बल्कि भाषा सुरक्षा आंदोलन, विछिन्नांचल मिश्रण, शिक्षा का प्रसार, सामाजिक सुधार, उत्कलीय स्वाभिमान से जु़ड़े विषयों को भी प्रमुखता से उठाया जाता था। इसके समेत बामड़ा राजा वासुदेव सुढलदेव के शासन काल में ही बामड़ा से बारकोट तक 78 मील लंबी टेलीफोन लाइन खींची गई थी, जो राज्य की सबसे लंबी टेलीफोन लाइन है।

Posted By: Jagran

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