जागरण संवाददाता, राउरकेला : विश्वकप क्रिकेट में सट्टा कारोबार के मामले में गिरफ्तार नागरमल अग्रवाल को राउरकेला एसडीजेएम द्वारा जमानत दिए जाने को कानून के खिलाफ बताकर राउरकेला वकील संघ की ओर से 22 जुलाई से शुरू काम बंद आंदोलन अंतत: 45 दिन बाद समाप्त हो गया। वकील शुक्रवार से एसडीजेएम कोर्ट छोड़कर अन्य सभी कोर्ट में योगदान देंगे। ओडिशा हाईकोर्ट ने इस मामले की विजिलेंस जांच का निर्देश के साथ वकीलों से काम पर वापस आने का अनुरोध किया। जिसके बाद वकील संघ ने गुरुवार से आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।

विश्वकप क्रिकेट में सट्टा के मामले में गिरफ्तार नागरमल अग्रवाल को एसडीजेएम द्वारा जमानत दिए जाने को संघ ने कानून के विरुद्ध बताया था। इसे लेकर उच्च न्यायिक अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया था। लेकिन कोई नतीजा न निकलने पर वकील संघ ने विगत 22 जुलाई से काम बंद आंदोलन शुरू कर दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने राउरकेला वकील संघ की मांग को ग्रहण कर एसडीजेएम की ओर से दिए गए आदेश की विजिलेंस जांच का निर्देश दिया है। जिसमें ओडिशा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार विजिलेंस ललित कुमार दाश को इसकी जांच खत्म कर सात सितंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश देने के साथ-साथ राउरकेला वकील संघ से काम में योगदान देने का अनुरोध किया था।

गुरुवार को सुबह रजिस्ट्रार विजिलेंस ने राउरकेला वकील संघ के कार्यालय में पहुंचकर संघ के सभी सदस्यों को हाईकोर्ट के निर्देश से अवगत कराते हुए जांच शुरू की। उन्होंने संघ द्वारा उठाये गए मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए निश्चित रूप से कार्रवाई होने की बात कही। जिस पर वकील संघ ने शुक्रवार से एसडीजेएम कोर्ट को छोड़कर अन्य सभी कोर्ट में काम में योगदान देने का निर्णय लिया। संघ ने कहा कि एसडीजेएम कोर्ट में अगर कैदी खुद के प्रयास से अपने अपने मामलों का निपटारा कराते हैं तो कोई विरोध नहीं किया जाएगा।

45 दिन से परेशान शहरवासी: वकीलों के आंदोलन के कारण राउरकेला कोर्ट का काम पिछले 45 दिन से बंद होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। अनेक मामलों में जमानत मिलने के बावजूद लोग जेल से छूट नहीं पाए। राउरकेला स्पेशल जेल के बाहर परेशान परिजन रोज इस उम्मीद में पहुंचते रहे कि संभवत: उनके अपनों को जेल से बाहर आने का मौका मिलेगा। ऐसे लोगों में दुधमुंहे बच्चों के साथ महिलाएं भी नजर आई जो घटों खड़ी रहतीं। कहतीं उनके घर में कमानेवाला इकलौता शख्स जेल में है। किसी तरह जमानत करायी गयी लेकिन जेल से बाहर नहीं निकल पा रहे। अब इन सभी लोगों को अब राहत मिलेगी।

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जनता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन किया गया था। एक मामले के तीन आरोपियों में एक अमीर आरोपी को जमानत मिली जबकि दो गरीबों को जेल जाना पड़ा। इस वजह से पूरा आंदोलन हुआ। लोगों को परेशानी हुई। लेकिन यह लड़ाई लोगों के लिए ही लड़ी गयी ताकि उन्हें भविष्य में बराबर न्याय मिले।

- अक्षय साहु, महासचिव, राउरकेला बार एसोसिएशन

Posted By: Jagran

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