जागरण संवाददाता, राउरकेला : कोरोना महामारी की दूसरी लहर में सुंदरगढ़ जिले में जन जीवन अस्त व्यस्त रहा। मौत के डर से लोग विभिन्न शहरों से काम छोड़ कर गांव लौट गए हैं। काम नहीं होने के कारण उन्हें रोजगार मिलना मुश्किल हो गया था। ऐसे में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण निश्चित रोजगार योजना (मनरेगा) आशा की किरण बनी है। लोगों को अपने गांव में ही काम मिल रहा है। मार्च महीने से जिले में रिकार्ड श्रम दिवस का सृजन किया गया। ढाई महीने में 32,71,349 श्रम दिवस का सृजन कर लोगों को काम दिया गया।

सुंदरगढ़ जिले में केवल जून महीने में 3,43,459 श्रम दिवस का सृजन किया गया है। इनमें से सुंदरगढ़ सदर ब्लॉक में सर्वाधिक 33,396 श्रम दिवस तथा बणई जिले में सबसे कम 10,205 श्रम दिवस का काम हुआ। इसी तरह बालीशंकरा ब्लॉक में 21,169, बड़गांव में 12,047, बिसरा ब्लाक में 12,456, गुरुंडिया ब्लाक में 12,363, हेमगिर ब्लॉक में 25,585, कोइड़ा में 14,663, कुआरमुंडा ब्लॉक में 15,246, एवं कुतरा ब्लॉक में 19,399 श्रम दिवस का सृजन कर लोगों को काम मिला। लहुणीपाड़ा ब्लाक में 17,374, लेफ्रीपाड़ा में 27,939, राजगांगपुर में 24,951, सबडेगा में 21,599, टांगरपाली में 22,199 श्रम दिवस पर सड़क, तालाब समेत अन्य मिट्टी का काम हुआ है। अप्रैल महीने में 17,45,075 श्रम दिवस, मई महीने में 11,82,795 श्रम दिवस समेत ढाई महीने में कुल 32, 71,349 श्रम दिवस पर काम हो चुका है। दैनिक मजदूरी भी 207 रुपये में 91 रुपये बढ़ोत्तरी की गई है एवं अब एक दिन काम करने पर 298 रुपये मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में काम मिलने के कारण लोगों की बेरोजगारी दूर हो रही है एवं विकास का काम भी तेजी से हो रहा है।

Edited By: Jagran