जागरण संवाददाता, राउरकेला :

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के सौजन्य तथा राउरकेला स्टील प्लांट के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय पूर्वोत्तर नाट्य समारोह शुरू हो गया है। सोमवार की शाम इसका उद्घाटन सिविक सेंटर में किया गया। समारोह में शामिल होने के लिए रंगमंच के विशिष्ट कलाकार यहां जुटे हैं।

समारोह का उद्घाटन करते हुए राउरकेला स्टील प्लांट के ईडी (कार्मिक एवं प्रशासन) पीके प्रधान ने कहा कि राउरकेला शहर संस्कृति का प्राण ¨बदु है। यहां पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से नाटकों का मंचन गर्व का विषय है। इस अवसर पर एनआइटी के कुल सचिव संतोष उपाध्याय ने कहा कि भारत सरकार ने उत्तर पूर्व तथा पूर्वी भारत को जोड़ने के लिए विकास के विभिन्न काम कर रही है। वहीं इन राज्यों को आपसी संस्कृति से जोड़ने को लेकर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का यह प्रयास भी प्रशंसनीय है। समारोह के संयोजक सुकुमार टुडु ने सभी का स्वागत किया।

इस मौके पर आंचलिक संयोजक नलिनी निहार नायक ने कहा कि इस समारोह के माध्यम से ओडिशा की कला व संस्कृति को जोड़ने का प्रयास किया गया। इस दौरान कृष्णम राउरकेला की ओर से कालाहांडी का घुडुका लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर कृष्णचंद्र मल्लिक को सम्मानित किया गया। जिसके बाद अरचिड थियेटर नागा व असम संस्था की ओर 'बब्ल्स इन दी रिवर' नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक में बताया गया असम के मूलवासी के साथ मुगल व आदिवासी भी यहां रहने लगे हैं। जिससे ब्रह्मापुत्र नदी के बुलबुलों की भांति इनकी भी संख्या बढ़ने लगी है। जिससे इसका पता नहीं चल पाता है कि असम का मूल निवासी कौन है। मंच का संचालन अनिल मल्लिक व मनस्विनी दास ने किया। सतवीर ¨सह ने धन्यवाद दिया।

Posted By: Jagran

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